Afghan Refugees: अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने पाकिस्तान सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की थी. मगर पाकिस्तान सरकार ने न सिर्फ यह मांग ठुकरा दी बल्कि इसे 'आंतरिक मामला' बताकर दुनिया को जवाब भी दे दिया.
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Afghan Refugees: पाकिस्तान में अफगान रिफ्यूजियों के खिलाफ सख्त रुख अपनाते हुए शहबाज सरकार ने 31 मार्च 2024 की एक डेडलाइन तय की थी. इस तारीख तक सभी अफगान नागरिक कार्ड (ACC) धारकों और अवैध रूप से रह रहे रिफ्यूजियों को मुल्क छोड़ने को कहा गया. शहबाज सरकार ने यह भी साफ किया कि डेडलाइन के बाद जो लोग नहीं लौटेंगे, उन्हें जबरन निर्वासित कर दिया जाएगा.
इस नीति को लेकर पाकिस्तान के भीतर ही विरोध के सुर तेज हो गए हैं. खैबर-पख्तूनख्वा (के-पी) प्रांत की सरकार ने शहबाज सरकार की नीति को 'दोषपूर्ण' बताया है और कहा है कि वे जबरन किसी भी अफगान रिफ्यूजी को नहीं निकालेंगे. सीएम अली अमीन गंडापुर ने साफ शब्दों में कहा कि, "हम किसी पर दबाव नहीं डालेंगे. अगर कोई स्वेच्छा से अपने देश जाना चाहता है, तो हम उसकी मदद करेंगे लेकिन जबरन निर्वासन अमानवीय है."
इतने लोगों को किया गया है डिटेन
गंडापुर का यह बयान ऐसे समय में आया है जब इस्लामाबाद, रावलपिंडी और कराची जैसे शहरों में अफगान रिफ्यूजियों को जबरन हिरासत में लिया जा रहा है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक कराची में 16,000 से ज्यादा ACC कार्ड धारकों को वापस भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और अब तक 150 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया जा चुका है.
अंतरराष्ट्रीय समुदाय और संयुक्त राष्ट्र शरणार्थी एजेंसी (UNHCR) ने पाकिस्तान सरकार से इस नीति पर पुनर्विचार करने की अपील की थी. मगर पाकिस्तान सरकार ने न सिर्फ यह मांग ठुकरा दी बल्कि इसे 'आंतरिक मामला' बताकर दुनिया को जवाब भी दे दिया.
अफगानिस्तानियों को पाक सरकार निकाल रहा है बाहर
पाकिस्तान की संघीय सरकार का यह रवैया बेहद चिंताजनक है. ऐसे समय में जब अफगानिस्तान में हालात लगातार बिगड़ रहे हैं, लोगों की जान खतरे में है, तब पाकिस्तान का यह सख्त रुख न सिर्फ मानवीय मूल्यों के खिलाफ है बल्कि इसकी अंतरराष्ट्रीय छवि को भी नुकसान पहुंचा रहा है. खास बात यह है कि पाकिस्तान खुद भी दशकों तक अंतरराष्ट्रीय मदद से इन रिफ्यूजियों की देखभाल करता रहा है लेकिन अब जब अफगानी लोग सबसे ज़्यादा असुरक्षित हैं, तो उन्हें यूं बाहर निकालना अंतरराष्ट्रीय मानवाधिकार नियमों का भी उल्लंघन है.