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लगेगी आग तो आयेंगे कई घर ज़द में,
यहाँ पर सिर्फ मेरा मकान थोड़े है..
मशहूर शायर राहत इन्दौरी का ये बेहद मकबूल शेर आजकल उत्तर प्रदेश में सरकारी ज़ुल्म- ज्यादती के शिकार मुसलमानों की तर्जुमानी कर रहा है. वहीँ कबीर दास का दोहा, 'जाके पांव न फटे बिवाई सो क्या जाने पीर पराई' प्रदेश के हिन्दू कारोबारी और समाज के हालात और जज़्बात बयान करता हुआ दिखाई दे रहा है.
गुजिश्ता 10 सालों से किसी जुर्म के मुल्जिम या किसी मुसलमान के जरिये सरकारी ज़मीन पर मुबैयना गैर- कानूनी कब्ज़े पर बुल्डोज़र एक्शन पर खुश होने और सरकार की पीठ ठोकने वाला समाज आज खुद दुखी है.. वो सरकार को इस बात के लिए कोस रहे हैं कि सरकार सुप्रीम कोर्ट तक की बात नहीं मान रही है. कोर्ट के आदेशों को नज़रअंदाज़ कर मनमानी कर रही है. अब आदमी इन्साफ के लिए कहाँ जाएगा? किस्से अपनी गुहार लगाएगा ?
मेरठ के हिन्दू कारोबारी सरकार के बुलडोज़र एक्शन के खिलाफ बेमियादी हड़ताल पर बैठ गए हैं. मेरठ के सेंट्रल मार्केट में बुल्डोज़र एक्शन की तलवार लटकने से कारोबारी गम, सदमे और गुस्से में हैं. जिले के आवास विकास परिषद ने तकरीबन 1460 कथित अवैध दुकानों को नोटिस जारी कर दुकान खाली करने या फिर मुन्हदिम की कार्रवाई का सामना करने का नोटिस दे दिया है. इसके बाद मकामी कारोबारी सड़क पर उतर गए हैं. उन्होंने बेमियादी हड़ताल की अपील करते हुए अपने दुनाक बंद कर दिए हैं.
इसके पहले कारोबारियों ने शांति मार्च निकालकर विरोध दर्ज कराया और सरकार से दुकानों को रेगुलराइज करने की अपील की है. साथ ही, आवास विकास के भ्रष्ट अफसरों पर कार्रवाई की मांग की है.
कारोबारी नेता जितेंद्र अग्रवाल ने बताया कि मेरठ के सेंट्रल मार्केट में कल 31 भूखंड है जिन पर 1460 दुकानें बनी है. अगर ये दुकाने तोड़ दी जाती है, तो हजारों लोगों के सामने रोजी- रोटी का संकट पैदा हो जाएगा. हजारों लोगों के रोजगार ख़त्म हो जायेंगे. ऐसे में वो कहाँ जाएंगे ?
इसके पहले वाराणसी की दालमंडी की सैकंडों दुकाने सरकार के बुल्डोज़र एक्शन के निशाने पर हैं. इस दालमंडी में प्रभावित होने वाले दुकानदार हिन्दू और मुस्लिम दोनों समुदाय के हैं. यहाँ सड़कें चौड़ीकरण करने के लिए 180 से ज्यादा दुकाने तोड़ी जानी है. कारोबारियों का इल्ज़ाम है कि किसी का रोजगार और रोजी- रोटी छीनकर ये कैसा विकास कर रही है सरकार ? मुरादाबाद के बाज़ार समिति की दुकाने भी इसी अवैध निर्माण के नाम पैर तोड़े जा चुके हैं. सालों से जमे जमाये कारोबार को सरकार पलभर में मिटटी में मिला दे रही थी.. कोरोबारी वर्ग शुरू से भाजपा का समर्थक रहा है, लेकिन ख़ास बात ये है कि सरकार भाजपा से जुड़े व्यापारियों को भी नहीं बख्श रही हैं. उनकी भी दुकानों को गिरा रही है.
बरेली के शाहबाद में भी हिन्दुओं के 27 घरों को बुलडोज़र एक्शन के लिए नोटिस भेजा गया है. दिल्ली में सैकड़ों घर अविध निर्माण के नाम पर गिराए जा चुके हैं.
वाराणसी दालमंडी में बुल्डोज़र एक्शन के निशाने पर आये दुकानदान अब्दुर्रहीम कहते हैं, "भाजपा सरकार ने कसम तो खाया था माफियाओं को मिटटी में मिलाने का लेकिन वो आम आदमी को भी मिटटी में मिला रही है.. न दुकानदारों को कोई वैकल्पिक दुकाने अलोट की जा रही है न कोई मुआवजा दिया जा रहा है.. कारोबारी क्या करेंगे?"
उत्तर प्रदेश में ऐसे कई जगहों पर सरकार के अफसरों ने बुल्डोज़र की कार्रवाई की है, जिसपर कोर्ट ने स्टे दे दिया था. अफसर कोर्ट के आदेश को नहीं मान रहे हैं..
हालांकि, जब भाजपा शासित असम, उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड और मध्य प्रदेश में कोर्ट के बार- बार स्टे आदेशों के खिलाफ मुस्लिम आरोपियों के घर और दुकानें गिराई जा रही थी, तो बाकी लोग उनके खिलाफ हो रहे जुल्म- ज्यादतियों का विरोध करने के बजाये सरकार का समर्थन कर रहे थे. अब उन्हें इस बात का एहसास हो रहा है कि किसी भी सरकार के मनमानी का समर्थन अवाम के हक़ में ठीक नहीं है.. लेकिन मूल सवाल अभी भी वो ही है कि क्या बिना किसी उचित कानूनी प्रक्रिया के मुसलमानों के घर और दुकानें गिराये जाने की सरकार की बुल्डोज़र एक्शन का लोग खुलकर विरोध करेंगे?
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