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Mahmood Madani Controversy: जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट मौलाना महमूद मदनी के 'ज़ुल्म और जिहाद' वाले हालिया बयान ने सियासी तूफान खड़ा कर दिया है. बीजेपी नेताओं समेत कई राजनीतिक पार्टियां जमीयत चीफ की आलोचना कर रही हैं और उनके बयान की निंदा कर रही हैं. साथ ही बीजेपी के नेता मदनी के बयान को देश विरोधी सोच करार दे रहे हैं. दिलचस्प बात यह है कि 2019 के बाद से मदनी लगातार नरेंद्र मोदी सरकार पर हमलावर हैं, जबकि एक दौर ऐसा भी था जब वे खुलकर मोदी की तारीफ करते नजर आते थे. ऐसे में सवाल यह है कि कौन से राजनीतिक या सामाजिक कारण हैं जो मदनी को हर मुद्दे पर मोदी सरकार के खिलाफ खड़ा कर रहे हैं?
दरअसल, साल 2014 लोकसभा चुनाव के एक साल पहले 2013 में एक इंटरव्यू के दौरान जमीयत के उस समय के जनरल सेक्रेटरी मौलाना महमूद मदनी ने गुजरात के उस समय के मुख्यमंत्री नरेंद्र मोदी की तारीफ़ की थी और दावा किया था कि उनके चुनाव क्षेत्र में मुसलमानों ने भारी वोट दिया था. मदनी पहली बार खुलकर माना है कि मोदी को लेकर मुसलमानों की सोच अब पहले जैसी नहीं रही.
मदनी पीएम मोदी के थे फैन
मदनी ने कहा था कि लोगों के मन में साफ बदलाव आया है और अब हालात अलग हैं. मैं मानता हूं कि समय बदल रहा है. गुजरात में मुसलमान आर्थिक रूप से उन कई राज्यों से बेहतर हैं जहां तथाकथित सेक्युलर सरकारें सत्ता में हैं. जमीयत चीफ ने कहा था कि Darul Uloom Deoband की राजनीतिक शाखा जमीयत उलेमा-ए-हिंद (Jamiat Ulema-e-Hind) लाखों मुसलमानों की सोच और दिशा तय करती है. ऐसे में जमीयत की तरफ से नरेंद्र मोदी को लेकर दिया गया यह बयान, दिल्ली की सत्ता संभालने से ठीक पहले, एक तरह से उनका 'छिपा हुआ समर्थन' माना जा रहा था. इस बयान के बाद मदनी अपने ही लोगों से घिर गए. मुस्लिम संगठनों ने तीखा हमला किया और मदनी से माफी की मांग की. कुछ मुस्लिम संगठन के लोग मदनी को बीजेपी का एजेंट भी बता दिया था
ट्रिपल तलाक से बिगड़ा मामला
समय के साथ बीजेपी की केंद्र सरकार और मुस्लिम संगठनों के बीच रिश्ते लगातार खराब होते गए. इसकी शुरुआत ट्रिपल तलाक कानून से हुई. सरकार ने इसे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का मामला बताया, लेकिन जमीयत उलेमा-ए-हिंद समेत कई मुस्लिम संगठनों ने इसे धार्मिक मामलों में सरकारी दखलंदाजी बताकर इसकी आलोचना की. इस दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ हिंसा की कई घटनाएं सामने आईं, जिससे गुस्सा और गहरा गया.
CAA-NRC की चिंगारी पूरे देश में फैली
इसके बाद मोदी सरकार CAA-NRC लेकर आई. इस कानून ने मुस्लिम समुदाय के अंदर डर और असुरक्षा का माहौल बना दिया. कई संगठनों का मानना था कि यह कानून मुसलमानों को निशाना बनाकर बनाया गया है. दिल्ली से लेकर उत्तर भारत तक पूरे देश में बड़े पैमाने पर विरोध प्रदर्शन हुए. इन विरोध प्रदर्शनों के कारण कई जगहों पर पुलिस कार्रवाई और झड़पें भी हुईं. देश की राजधानी दिल्ली में साल 2020 में दंगे भी हुए. इस दंगे में कई लोग मारे गए. जबकि हजारों लोग घर से बेघर हो गए. जमीयत का मनाना है कि अभी भी दिल्ली दंगे से जुड़े केस में कई निर्दोष मुसलमान जेल में बंद हैं.

वक्फ पर बिगड़ गई बात
इस बीच, नरेंद्र मोदी सरकार ने अपने तीसरे कार्यकाल में वक्फ एक्ट लागू किया. इस कानून ने एक नया विवाद खड़ा कर दिया है. मुस्लिम संगठनों का आरोप है कि इस कानून से वक्फ प्रॉपर्टी को खतरा होगा और समुदाय के धार्मिक और सामाजिक संस्थानों को नुकसान होगा. जमीयत समेत कई संगठनों ने इसका खुलकर विरोध किया है और सरकार को चेतावनी दी. जमीयत उलेमा-ए-हिंद ने वक्फ अमेंडमेंट बिल 2025 के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में पिटीशन फाइल की. जमीयत का मानना था कि यह बिल गैर-संवैधानिक, गैर-लोकतांत्रिक है और मुस्लिम समुदाय के अधिकारों का उल्लंघन करता है, जिसमें वक्फ बोर्ड में बदलाव और प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन को ज़रूरी करना जैसे नियम शामिल हैं. सुप्रीम कोर्ट ने बिल के कुछ नियमों पर रोक लगा दी है, जिसका जमीयत ने स्वागत किया है, लेकिन यह भी कहा है कि वह कानून के खिलाफ अपनी लड़ाई जारी रखेगा.
देश में फैल रही है नफरत की आग
आज देश के कई हिस्सों में मुसलमानों के खिलाफ नफरत का माहौल बनता जा रहा है. गांव-कस्बों में हिंदू संगठनों पर आरोप लग रहे हैं कि वे त्योहारों, मेलों और छोटे कस्बों में मुस्लिम व्यापारियों को परेशान कर रहे हैं. कहीं दुकानों के बाहर विवाद हो रहा है, तो कहीं जबरन दुकानें बंद कराई जा रही हैं. महाकुंभ जैसे बड़े धार्मिक आयोजनों से लेकर गांव-गांव तक मुसलमानों का खुला विरोध देखने को मिल रहा है. हाल ही में बागेश्वर धाम की अगुआई में एक 'सनातन हिंदू एकता पदयात्रा' निकाली गई. इस यात्रा में शामिल कुछ धर्मगुरुओं पर इल्जाम है कि उन्होंने मंच से मुसलमानों के खिलाफ ज़हरीले बयान दिए. कई जगह यह भी कहा गया कि कुछ मस्जिदों के नीचे मूर्तियां दबे होने की बातें की गई हैं. साथ ही बाबरी मस्जिद का बार-बार ज़िक्र करके पुराने जख्मों को फिर से कुरेदने की कोशिश की गई.
मस्जिदों पर भी देश में बवाल
देश की कई ऐतिहासिक मस्जिदों के आसपास का माहौल इस समय काफी गरम है. हिंदू संगठन लगातार दावा कर रहे हैं कि संभल की शाही जामा मस्जिद, आगरा की जामा मस्जिद, ज्ञानवापी मस्जिद और मथुरा की शाही ईदगाह मस्जिद मंदिर हैं. इससे देश में तनाव का माहौल बन गया है. आरोप यह भी लग रहे हैं कि सरकार इन हेट स्पीच और हिंसा को रोकने के लिए कोई ठोस कदम नहीं उठा रही है. इसके उलट, BJP नेता अक्सर ऐसे बयान देते हैं जिससे आग और भड़कती है. नफरत की आग को हवा देने वाले इन नेताओं को सरकार में मंत्री बनाया गया है और पार्टी में अहम जिम्मेदारियां दी गई हैं.
आखिर मदनी को क्यों देना पड़ा ऐसा बयान
देश में नफरत, हिंसा और असुरक्षा के बढ़ते माहौल ने आम मुसलमानों को गहरे डर में जीने पर मजबूर कर दिया है. हर जगह मुसलमानों को निशाना बनाया जा रहा है, उनके बिजनेस पर असर पड़ रहा है और धार्मिक जगहों को लेकर झगड़े बढ़ रहे हैं. ऐसे हालात में समाज के अंदर भरोसा कमज़ोर हो रहा है और लोगों को अपनी सुरक्षा खतरे में लगने लगी है. ऐसा माना जा रहा है कि इसी माहौल के दबाव में जमीयत उलेमा-ए-हिंद के प्रेसिडेंट महमूद मदनी ने 'ज़ुल्म और जिहाद' को लेकर एक बयान बयान दिया.
जमीयत चीफ ने क्या कहा था
जमीयत उलेमा-ए-हिंद के चीफ महमूद मदनी ने एक सभा को संबोधित करते हुए कहा, "अगर ज़ुल्म होगा, तो जिहाद होगा." उन्होंने ज्यूडिशियरी और सरकार पर माइनॉरिटी के अधिकारों को कमज़ोर करने का भी इल्जाम लगाया. हालांकि, मदनी ने बाद में इस बयान पर सफाई दी है. महमूद मदनी ने न्यूज़ एजेंसी ANI को दिए इंटरव्यू में कहा कि जिहाद को लेकर लोगों में गलतफहमी है. जिहाद का असली मतलब है अपने मकसद को साफ-साफ समझना, खुद को बेहतर बनाना और नाइंसाफ़ी के खिलाफ आवाज उठाना है. उन्होंने कहा कि जमीयत उलेमा-ए-हिंद में शामिल होने के बाद से उन्होंने इसे अपनी ज़िंदगी का मकसद बना लिया है.
मदनी ने कहा कि आतंकवादियों ने जिहाद शब्द का गलत मतलब निकाला है. हम जिहाद को आतंकवाद से लड़ना मानते हैं, आतंक फैलाना नहीं. उन्होंने आरोप लगाया कि 'लव जिहाद' और 'लैंड जिहाद' जैसे शब्द मुसलमानों को बदनाम करने के लिए बनाए गए हैं. उन्होंने साफ किया कि उनके बयान का आतंकवाद से कोई लेना-देना नहीं है. वह देश की तरक्की और सुरक्षा के लिए खड़े हैं और लोगों से पाकिस्तान की गलत सोच से सावधान रहने की अपील की.