Upendra Dwivedi on Operation Sindoor: ऑपरेशन सिंदूर को लेकर आर्मी चीफ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बताया कि भारतीय सेना ने पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर हमला करते समय नमाज के समय से बचकर कार्रवाई की, ताकि आम लोगों की जान को नुकसान न पहुंचे.
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Operation Sindoor: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम आतंकी हमले के बाद भारत ने पाकिस्तान में बैठे आतंकियों के खिलाफ ऑपरेशन सिंदूर किया था. इस ऑपरेशन में 100 से ज्यादा आतंकी मारे गए थे और कई ठिकाने तबाह हो गए थे. इसके बाद पाकिस्तान ने जवाबी कार्रवाई करते हुए भारत पर हमला किया. पाकिस्तान के सभी हमले को भारत के एयर डिफेंस सिस्टम ने नाकाम कर दिया है. अब ऑपरेशन सिंदूर को लेकर भारत के आर्मी चीफ़ जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने बड़ा खुलासा किया है. उन्होंने कहा कि'ऑपरेशन सिंदूर' के समय भारतीय सेना ने पाकिस्तान में मौजूद आतंकवादी ठिकानों में उस समय हमला करने का फैसला किया जब नमाज अदा न हो रही हो.
जनरल द्विवेदी ने यह बयान 8 अप्रैल को प्रकाशित एक इंटरव्यू के दौरान दिया. इस इंटरव्यू में जब जनरल से पूछा गया, "क्या 'ऑपरेशन सिंदूर' के दौरान कभी ऐसा कोई पल आया, जब आप रुके हों और कृष्ण और अर्जुन के बीच हुई बातचीत पर विचार किया हो? क्योंकि आपने खुद ही यह कहा है कि, कई बार जब आप दूसरों को तकलीफ पहुंचा रहे होते हैं, तो आप खुद से यह पूछने पर मजबूर हो जाते हैं. 'आखिर मैं कर क्या रहा हूं?"
"नमाज के वक्त नहीं करना था हमला"
इस सवाल का जवाब देते हुए आर्मी चीफ द्विदेदी ने कहा, "हां, आप सही हैं. मैं एक घटना के बारे में आपको बताता हूं कि जब हम टारगेट्स को तबाह करने जा रहे थे, तो उसकी टाइमिंग दो बजे, चार बजे या किसी भी वक़्त हो सकती थी. लेकिन हमने यह सुनिश्चित किया कि जब पाकिस्तान के लोग आतंकवादी ठिकानों में नमाज अदा कर रहे हों, हमने कहा कि उस समय हम हमला नहीं करेंगे, क्योंकि सबका मालिक एक है. इसी वजह से हमने ऐसा समय चुना जब हमें पता था कि नमाज नहीं हो रही होगी."
7 अप्रैल को पहलगाम में हुआ था आतंकी हमला
गौरतलब है कि पिछले साल अप्रैल में पहलगाम में हुए आतंकी हमले के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव तेजी से बढ़ गया था. इस हमले के जवाब में भारत ने सख्त सैन्य कार्रवाई करते हुए इसे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ नाम दिया. भारतीय सेना ने आतंकियों के ठिकानों को निशाना बनाकर जवाबी कार्रवाई की, जिससे सीमा पर हालात बेहद संवेदनशील हो गए. दोनों देशों के बीच सैन्य गतिविधियां बढ़ीं और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी इस तनाव को लेकर चिंता जताई गई. हालांकि, बाद में कूटनीतिक प्रयासों के जरिए स्थिति को नियंत्रण में लाने की कोशिश की गई, लेकिन दोनों देशों के रिश्तों में खटास बनी रही.