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... तो अब दरी नहीं बिछाएंगे सीमांचल के मुसलमान; क्या सच में ओवैसी ने तोड़ दिया तेजस्वी यादव का गुरूर ?

AIMIM performance in Bihar Election: बिहार विधानसभ चुनाव 2025 में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM ने कांग्रेस और राजद से 6 सीटें देकर पार्टी को महागठबंधन का हिस्सा बनाने की अपील की थी, लेकिन महागठबंधन ने इस प्रस्ताव को ठुकरा दिया था. अब AIMIM सीमांचल में 6 सीटों पर जीत दर्ज करती हुई नज़र आ रही है, जबकि महागठबंधन के उम्मीदवार यहाँ से शिकस्त खाते हुए दिखाई दे रहे हैं. 

... तो अब दरी नहीं बिछाएंगे सीमांचल के मुसलमान; क्या सच में ओवैसी ने तोड़ दिया तेजस्वी यादव का गुरूर ?

AIMIM performance in Bihar Election: बिहार विधान सभा चुनाव के नतीजे अबतक लगभग साफ़ हो चुके हैं. सीमांचल में असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM के 6 उम्मीदवार लगातार बढ़त बनाए हुए हैं. इसमें अमौर से अख्तरुल ईमान की जीत हो चुकी है. अगर बाकी के उम्मीदवार भी जीत दर्ज करते हैं, तो ओवैसी और उनकी पार्टी के लिए बिहार में ये अभूतपूर्व सफलता होगी. पिछली बार 2020 के चुनाव में सीमांचल में ओवैसी की पार्टी ने 5 सीटों पर जीत दर्ज की थी. हालांकि, दो साल बाद इनमें से 4 उम्मीदवारों ने ओवैसी को दगा देकर राजद ज्वाइन कर लिय था. लेकिन इस बार उन चारों विधायकों में से राजद ने किसी को टिकट नहीं दिया. यानी ऐसा कहा जा सकता है कि इनके पुराने रिकॉर्ड को देखकर तेजस्वी यादव ने भी इनपर भरोसा नहीं जताया..  

इस चुनाव में सीमांचल में ओवैसी की जीत इसलिए भी मायने रखती है कि स्वतंत्र रूप से चुनाव लड़ने के पहले ओवैसी ने कई बार महागठबंधन और उसके घटक दलों से AIMIM को इंडिया गठबंधन में शामिल करने की अपील की थी. लेकिन कांग्रेस और राजद दोनों ने ओवैसी के इस प्रस्ताव और अपील को ठुकरा दिया था. ओवैसी सिर्फ 6 सीट की मांग कर रहे थे, लेकिन महागठबंधन इसपर भी राज़ी नहीं हुआ.. अब ओवैसी की पार्टी इतनी ही सीट पर विजय होती दिख रही है.

सीमांचल में विधानसभा चुनाव प्रचार के कैम्पेनिंग के दौरान वोटर्स से मिल रही प्रतिक्रियानों से ऐसा लग रहा था कि सीमांचल में इस बार ओवैसी की पार्टी के उमीदवारों को जनता नकार देगी. यहाँ तक कि AIMIM के एकमात्र विधायक और प्रदेश अध्यक्ष अख्तरुल ईमान की जीत पर भी संशय बरकरार था. लेकिन सीमांचल में AIMIM को दूसरी बार मिल रही मेनडेट से राजद समेत सभी राजनीतिक दलों में बेचैनी देखी जा रही है..

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ग़ौरतलब है कि इस बार ओवैसी की पार्टी ने बिहार में सीमांचल सहित मिथलांचल में कुल 23 सीटों पर अपने उमीदवार उतारे थे. पिछले चुनाव में ओवैसी ने 20 सीटों पर चुनाव लड़ा था.  

ऐसा माना जा रहा है कि तेजस्वी यादव के ओवैसी को लेकर दिए बयानों से सीमांचल में राजद को भारी नुक्सान का सामना करना पड़ा. तेजस्वी यादव ने ओवैसी से गठबंधन ने करने की बड़ी वजह बताते हुए कहा था कि ओवैसी एक एक्सट्रीमिस्ट नेता है.. उनकी पार्टी को गठबंधन में शामिल करने पर गठबंधन से सेक्युलर चरित्र को नुक्सान पहुंचेगा.

चुनाव प्रचार के दौरान दो फीसदी आबादी वाले सहनी को डिप्टी सीएम और 14 फीसदी आबादी वाले यादव से सीएम उमीदवार की घोषणा भी राजद को भारी पड़ गया. ओवैसी की पार्टी ने जिस तरह से इस मुद्दे को भुनाया और 19 फीसदी आबादी वाले मुसलमान को दरी बिछाने के लिए रखने का नैरेटिव गढ़ा और जिस तरह सत्ता पक्ष के दलों ने भी इसका समर्थन किया, उससे निश्चित तौर पर सीमांचल में राजद के खिलाफ और AIMIM की हिमायत में माहौल बनाने का काम किया.

बिहार चुनाव के नतीजों पर  AIMIM के राष्ट्रीय प्रवक्ता वारिस पठान ने कहा, "हमने यह मुद्दा भी उठाया कि आपने (महागठबंधन) 2 प्रतिशत वोट वाले मल्लाह को उपमुख्यमंत्री घोषित किया है. आपने 14 प्रतिशत वोट वाले यादव को मुख्यमंत्री घोषित किया, लेकिन 19 फीसदी मुस्लिम आबादी को क्यों नहीं? मुसलमानों ने क्या गुनाह किया है? बिहार में 19 फीसदी मुसलमान हैं. क्या उनमें से कोई ऐसा नहीं है जो उपमुख्यमंत्री, मुख्यमंत्री बन सके? तेजस्वी हमारे पार्टी के सद्र को अतिवादी कह रहे हैं. उन्हें सभी मुसलमानों से माफ़ी मांगनी चाहिए."

वारिस पठान ने कहा, "हमारी पार्टी सीमांचल में अच्छा प्रदर्शन कर रही है. शाम तक नतीजे स्पष्ट हो जाएँगे, और हमें पूरा विश्वास है कि इस बार हमारे कई विधायक जीतेंगे.  जनता ने हमें प्यार, आशीर्वाद और वोटों से नहलाया है.  हम न तो एनडीए का हिस्सा हैं और न ही महागठबंधन का. हमने महागठबंधन के सदस्यों से पहले ही कह दिया था कि धर्मनिरपेक्ष वोटों का बंटवारा रोकने के लिए हमें मिलकर लड़ना चाहिए, और हमने छह सीटें माँगी थीं, लेकिन अहंकार की वजह से उन्होंने ऐसा नहीं किया."

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