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नई दिल्ली: दिल्ली हाई कोर्ट ने निजामुद्दीन मरकज को फिर से खोले जाने की गुज़ारिश वाली अर्ज़ी पर मंगलवार को दिल्ली पुलिस और दिल्ली वक्फ बोर्ड को संयुक्त रूप से जायज़ा लेने का हुक्म जारी किया. पिछले साल कोविड-19 महामारी के शुरुआती दिनों में तबलीगी जमात के एक प्रोग्राम के बाद मरकज को बंद कर दिया गया था.
पिछले साल 31 मार्च से बंद मरकज को फिर से खोलने की वक्फ बोर्ड की याचिका पर सुनवाई करते हुए जस्टिस मुक्ता गुप्ता ने कहा कि हर एक फरीक जायज़ा लेने के लिए पांच व्यक्तियों को नामित कर सकता है और उन्होंने 15 दिनों के भीतर इस पर एक रिपोर्ट मांगी.
अर्ज़ीगुज़ार के सीनियर वकील ने कहा कि दिल्ली डिजास्टर मैनेजमेंट अथॉरिटी (DDMA) के नए दिशा-निर्देशों के तहत सभी मजहबी मकाम अब ज़ायरीन के लिए खुले हैं, जिसके बाद अदालत ने यह आदेश पारित किया. वक्फ बोर्ड का प्रतिनिधित्व करने वाले वरिष्ठ वकील संजय घोष ने कहा कि मस्जिद इकलौता धार्मिक स्थान है जहां ताला लगा हुआ है.
वहीं, केंद्र सरकार के वकील रजत नायर ने कहा कि पूरी प्रोप्रटी का ‘‘सीमांकन’’ किया जाना है और इसके मुताबिक ही डीडीएमए का आदेश हर एक फरीक पर लागू होगा. अदालत ने कहा, 'अर्ज़ीगुज़ार के अधिकृत प्रतिनिधियों और संबंधित थाना प्रभारी समेत दिल्ली पुलिस के अधिकारियों की तरफ से संयुक्त रूप से जायज़ा लिया जाए ताकि (मरकज के भीतर) तीनों इलाकों का सीमांकन किया जा सके.'
(इनपुट- भाषा)
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