Hasan Nasrallah Anniversary 2025: इजरायल-लेबनान युद्ध में मारे गए हिजबुल्लाह पूर्व चीफ सैयद हसन नसरुल्लाह की बरसी 28 सितंबर को मनाई गई. इस मौके पर मुबंई के मोगल मस्जिद में भी उनकी बरसी बड़ी धूमधान से मनाई गई.
1/7Hasan Nasrallah Anniversary 2025: इजरायल-लेबनान युद्ध में मारे गए हिजबुल्लाह पूर्व चीफ सैयद हसन नसरुल्लाह की बरसी 28 सितंबर को मनाई गई. इस मौके पर मुबंई के मोगल मस्जिद में भी उनकी बरसी बड़ी धूमधान से मनाई गई.
2/7इस कार्यक्रम का आयोजन इस्ना अशरी यूथ्स फाउंडेशन और मस्जिद-ए-ईरानियन ने मिलकर किया था. इसमें औरतों और मर्दों दोनों के लिए अलग-अलग इंतजाम किए गए थे.
3/7इस कार्यक्रम में मौलाना सैयद रूहे जफर, मौलाना सैयद फैयाज बाकिर, मौलाना सैयद नजीबुल हसन ज़ैदी, मौलाना सैयद अबुल कासिम और मौलाना सैयद हुसैन महदी हुसैनी ने खिताब किया.
4/7सभी उलेमाओं ने सैयद हसन नसरुल्लाह की ज़िंदगी के अलग-अलग पहलुओं पर रोशनी डाली. उन्होंने बताया कि सैयद नसरुल्लाह का जीवन अल्लाह पर गहरे ईमान, विलायत के रास्ते पर वफादारी और ज़ुल्म के खिलाफ डटकर खड़े होने की मिसाल है. उलेमाओं ने कहा कि हसन नसरुल्लाह की आवाज सिर्फ सियासी नहीं बल्कि कुरान की तालीमात में जड़ें रखने वाली रूहानी पुकार थी.
5/7उलेमाओं ने आगे कहा कि हसन नसरुल्लाह मजलूम कौमों को इज्जत और हिम्मत के साथ खड़े होने का हौसला दिया. नसरुल्लाह मानते थे कि मजाहमत किसी एक देश या फिरके तक सीमित नहीं बल्कि पूरी उम्मत की ज़िम्मेदारी है.
6/7उन्होंने कहा कि उनकी शहादत यह याद दिलाती है कि कुर्बानी का रास्ता हमेशा ज़िंदा रहता है और शहीदों का खून इंसाफ़ के पेड़ को सींचता है. हमें भी अपने निजी और सामाजिक जीवन में इज्जत, सब्र और मजलूमों की मदद का रास्ता अपनाना चाहिए.
7/7इस मौके पर उनकी ज़िंदगी और जद्दोजहद पर बनी एक खास डॉक्यूमेंट्री भी दिखाई गई, जिससे लोगों को उनके सफ़र, कुर्बानियों और उनके मज़बूत पैग़ाम के बारे में गहरी जानकारी मिली.