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Zee SalaamPhotosगौमांस सेवन को लेकर क्या कहता है इस्लाम; पैगम्बर साहब (स.) ने सहाबा को दिया था ये जवाब
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गौमांस सेवन को लेकर क्या कहता है इस्लाम; पैगम्बर साहब (स.) ने सहाबा को दिया था ये जवाब

देश में पहले से ही गोमांस को लेकर विवाद चल रहा है. गोमांस खाने के शक में कई बेगुनाह मुसलमानों की हत्या की जा चुकी है. अब भी हिंदू संगठनों के लोग गोमांस को लेकर सख्त हैं.

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Islam and Beef Consumption: देश में पहले से ही गोमांस को लेकर विवाद चल रहा है. गोमांस खाने के शक में कई बेगुनाह मुसलमानों की हत्या की जा चुकी है. अब भी हिंदू संगठनों के लोग गोमांस को लेकर सख्त हैं. इन लोगों का मानना ​​है कि गोमांस पर प्रतिबंध लगना चाहिए और गाय को राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाना चाहिए. इस बीच बॉलीवुड के फेमस और सीनियर स्क्रिप्ट राइटर और सलमान खान के पिता सलीम खान ने गोमांस को लेकर बड़ा बयान दिया है, जिससे देशभर में बवाल हो गया है.

 

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सलमान खान के पिता ने कहा कि इंदौर के बाद से उनके परिवार के किसी भी सदस्य ने गोमांस नहीं खाया है. उन्होंने यह भी कहा कि ज़्यादातर मुसलमान गोमांस इसलिए खाते हैं क्योंकि यह सबसे सस्ता मांस है. सलीम खान ने एक चौंकाने वाला बयान भी दिया कि कुछ लोग तो इसे अपने पालतू कुत्तों को खिलाने के लिए भी खरीदते हैं. 

 

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सलीम खान ने परिवार में गोमांस न खाने की वजह के बारे में बात करते हुए उन्होंने कहा कि पैगंबर मोहम्मद की शिक्षाओं में साफ़ तौर पर कहा गया है कि गाय का दूध मां के दूध का विकल्प है और यह एक उपयोगी चीज़ है. सलीम ने बताया कि शिक्षाओं में कहा गया है कि गायों को नहीं मारना चाहिए और गोमांस खाना हराम है. सलमान खान के पिता ने कहा, पैगंबर मोहम्मद ने हर धर्म की अच्छी बातें अपनाई हैं. जैसे, यहूदियों से सिर्फ़ हलाल मांस खाने की बात छीन ली गई थी.

 

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ऐसे में आज हम आपको बताएंगे कि इस्लाम में गोमांस खाना हराम है या हलाल. साथ ही, गोमांस को लेकर पैगंबर मोहम्मद साहब (SAW) की क्या राय थी. आइए जानते हैं. दरअसल, इस्लाम में जिस जानवर का मांस खाना है उसे जायज़ और जिसका नहीं खाना है उसे हराम बताया गया है, और दोनों के बीच स्पष्ट रेखा भी खींच दी गई कि क्या खान है और क्या नहीं खाना है..

 

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इस्लाम में गाय, बैल, भैंस, बकरी, भेड़, ऊंट, हिरन, दुम्बा आदि जैसे शकाहारी और पालतू पशुओं के मांस खाने की इज़ाज़त दी गई है, जबकि शेर, बाघ, कुत्ता, जंगली जानवर आदि मांसहारी और हिंसक जानवरों के मांस खाने पर पाबन्दी लगाई गई है. सूअर, घोडा, गधा आदि के मांस खाने पर भी प्रतिबन्ध है. 

 

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इस्लाम में जिन जानवरों के मांस खाने की सही कहां गया है, उसमें भी ये शर्त लगाई गई है कि सिर्फ जिन्दा और स्वास्थ्य जानवरों को हालाल तरीके से जबह करने के बाद ही उसका मांस सेवन किया जा सकता है. मरे हुए किसी भी जानवर का मांस खाने से लोगों  को रोका गया है. 

 

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हालांकि, यहां यह ध्यान रखना ज़रूरी है कि इस्लाम में मांस खाना कोई कम्पल्सन नहीं है. बस खाने की इज़ाज़त दी गई है लेकिन किसी को मांस खाने के लिए  फोर्स नहीं किया गया है. कोई क्या खाए नहीं खाए उसकी मर्ज़ी पर है. लेकिन उनमे हलाल और हराम चीज़ों का ख्याल रखना है. 

 

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एक बार मोहम्मद साहब के साथ रहने वाले सहाबा ने उनसे गाय के मांस के बारे में पूछा था, तो उन्होंने कहाँ कि गाय के गोश्त में रोग और दूध में शिफा है. यानी गाय का दूध इंसानों के लिए उत्तम है लेकिन गोश बीमारी पैदा करता है. ये बात आज वैज्ञानिक तथ्यों से भी साबित हो चुकी है.

 

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मुफ़्ती अब्दुर रहीम कासमी कहते है, "इस्लाम इस बात की भी ताकीद करता है कि आप दूसरे के मजहबी आस्था का सम्मान करें और हुकूमत के कानून का पालन करें. इस लिहाज से अगर भारत में हिन्दू गाय को पवित्र मानते हैं और गाय काटना अपराध है, तो मुसलमानों को इसका सम्मान करना चाहिए." अगर कोई आदमी/मुसलमान चोरी-छिपे गाय के मांस का सेवन करता है, तो वो न सिर्फ देश के प्रचलित कानून का उल्लंघन करता है, बल्कि वो एक हराम काम भी कर रहा है. क्योंकि इस्लाम में चोरी हराम है.