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नई दिल्ली: कोरोना वायरस के मुल्क में बढ़ते असर को देखते हुए वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी इस वायरस से मुल्क वासियों को निजात देने की हर मुमकिन कोशिश कर रहे हैं और लोगों से हुकूमत की जानिब से जारी की गई हिदायात पर अमल करने की अपील कर रहे हैं. इसी सिम्द आज वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी ने कहा है कि यह वायरस हमला करने से पहले नस्ल, मज़हब, रंग, ज़ात नहीं देखता है. कोरोना तबका, ज़बान और हदूद भी नहीं देखता है. कोरोना से इस लड़ाई में में हम सब मुत्तहिद हैं. यह ट्वीट पीएमओ (PMO) के ट्वीटर हैंडल से ट्वीट किया गया है.
COVID-19 does not see race, religion, colour, caste, creed, language or borders before striking.
Our response and conduct thereafter should attach primacy to unity and brotherhood.
We are in this together: PM @narendramodi
— PMO India (@PMOIndia) April 19, 2020
इसके अलावा वज़ीरे आज़म नरेंद्र मोदी ने दुकानदारों और छोटे बड़े कारोबारियों का शुक्रिया अदा करते हुए अपने ट्वीटर अकाउंट से ट्वीट किया," हमें यह यकीनी करना है कि मुस्तकबिल में भी दुकानें सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल करते हुए चलेंगी, इस मुश्किल वक्त में तआवुन के लिए सभी दुकानदार और कारोबारी बधाई के मुस्तहिक हैं"
भविष्य में भी दुकानें सोशल डिस्टेंसिंग का पालन करते हुए चलें, हमें यह सुनिश्चित करना है। संकट की घड़ी में इस योगदान के लिए सभी दुकानदार और व्यापारी बधाई के पात्र हैं।
— Narendra Modi (@narendramodi) April 19, 2020
उन्होंने आगे कहा कि छोटे-छोटे दुकानदारों ने पूरे समाजी इंतेज़ामात को हमवार बनाए रखने में अहम तआवुन दिया है. समाज और मुल्क इनके इस तआवुन को हमेशा याद रखेगा, मैं जानता हूं कि खुद सोशल डिस्टेंसिंग पर अमल करना और दूसरों से इस पर अमल करवाना बेहद चैलेंजिंग है.
इस संकट की घड़ी में देशवासी लॉकडाउन का पालन कर पा रहे हैं, इसमें समाज के अनेक वर्गों की सकारात्मक भूमिका है। हम कल्पना करें कि हमारे ये छोटे-छोटे व्यापारी और दुकानदार खुद के जीवन का रिस्क न लेते और रोजमर्रा की जरूरत का सामान न पहुंचाते तो क्या होता?
— Narendra Modi (@narendramodi) April 19, 2020
वज़ीरे आज़म ने कहा कि इस बोहरान में मुल्क के शहरी लॉकडाउन पर अमल कर रहे हैं, इसमें समाज के अनेक तबकों का मसबत किरदार है. हम तसव्वुर करें कि हमारे ये छोटे-छोटे कारोबारी और दुकानदार खुद की ज़िंदगी का रिस्क न लेते और रोज़मर्रा की ज़रूरत का सामान न पहुंचाते तो क्या होता?
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