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नई दिल्ली: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ( Narendra Modi) ने आज कौम के नाम खिताब के दौरान, तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का ऐलान किया है. उन्होंने अपने खिताब में कहा, 'आज मैं आपको, पूरे देश को, ये बताने आया हूं कि हमने तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने का फैसला लिया है. इस महीने के अंत में शुरू होने जा रहे संसद सत्र में, हम इन तीनों कृषि कानूनों को वापस लेने के आइनी अमल को पूरा कर देंगे.'
काबिले ज़िक्र है कि तीनों नए कृषि कानूनों को 17 सितंबर, 2020 को लोकसभा ने मंजूर किया था. राष्ट्रपति ने तीनों कानूनों के प्रस्ताव पर 27 सिंतबर को दस्तखत कर दिए थे. इसके बाद से ही किसान संगठनों ने कृषि कानूनों के खिलाफ आंदोलन शुरू कर दिया था. पिछले एक साल से किसान दिल्ली के बॉर्डर पर धरना दे रहे थे. प्रकाश पर्व पर मोदी का संबोधन सुबह 9 बजे शुरू हुआ. यह कोरोना के दौर में देश के नाम उनका 11वां पैगाम था. इस बार 18 मिनट का उनका पूरा जोर किसानों पर ही रहा.
गौरतलब है कि इससे पहले इन तीनों कृषि कानूनों को लेकर किसानों और हुकूमत के दरमियान कई बैठके हुईं, जिनमें कोई बातचीत के जरिए इसका हल निकालने की कोशिश की गई, लेकिन सारी मीटिंगें बेनतीजा रहीं और कोई हल नहीं निकल सका. किसानों की वाहिद मांग थी कि इन तीनों कृषि कानूनों को वापल लिया जाए और इससे कम किसान किसी सूरते में तैयार नहीं हुए, जबकि हुकूमत इन कानूनों में संशोधन के लिए पहले तैयान थी.
ये बात भी काबिले जिक्र है कि तीनों कृषि कानूनों को रद्द करने की मांग को लेकर किसान करीब 14 महीने से धरना दे रहे थे और मांग कर रहे थे कि कृषि कानूनों वापल लिया जाए. अब आखिरकार मोदी हुकूमत को किसानों के सामने झुकना पड़ा है और खुद वज़ीरे आज़म ने इन तीनों कृषि कानूनों वापस लेने का ऐलान किया.
तो आइए जानते क्या हैं वह तीनों कृषि कानून जिनकी जवह से किसान लंबे अर्से से प्रोटेस्ट कर रहे थे.
1. किसान उपज व्यापार एवं वाणिज्य (संवर्धन एवं सुविधा) विधेयक 2020: इस कानून में एक ऐसा इकोसिस्टम बनाने का प्रावधान है, जहां किसानों और कारोबारियों को मंडी के बाहर फसल बेचने की आजादी होगी. कानून में राज्य के अंदर और दो राज्यों के बीच कारोबार को बढ़ावा देने की बात कही गई है. साथ ही मार्केटिंग और ट्रांसपोर्टेशन का खर्च कम करने की बात भी इस कानून में है.
2. किसान (सशक्तिकरण एवं संरक्षण) मूल्य आश्वासन अनुबंध एवं कृषि सेवाएं विधेयक 2020: इस कानून में कृषि करारों (एग्रीकल्चर एग्रीमेंट) पर नेशनल फ्रेमवर्क का प्रावधान किया गया है. ये कृषि उत्पादों की बिक्री, फार्म सेवाओं, कृषि बिजनेस फर्म, प्रॉसेसर्स, थोक और खुदरा विक्रेताओं और निर्यातकों के साथ किसानों को जोड़ता है. इसके साथ किसानों को क्वालिटी वाले बीज की आपूर्ति करना, फसल स्वास्थ्य की निगरानी, कर्ज की सुविधा और फसल बीमा की सुविधा देने की बात इस कानून में है.
3. आवश्यक वस्तु (संशोधन) विधेयक: इस कानून में अनाज, दलहन, तिलहन, खाद्य तेल, प्याज और आलू को आवश्यक वस्तुओं की लिस्ट से हटाने का प्रावधान है. हुकूमत के मुताबिक, इससे किसानों को उनकी फसल की सही कीमत मिल सकेगी, क्योंकि बाजार में कॉम्पिटीशन बढ़ेगा.
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