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Mohammad Mohsing Asrar: मोहम्मद मोहसिन असरार उर्दू के बेहतरीन शायर हैं. वह 14 अगस्त 1948 में पाकिस्तान के कराची में पैदा हुए. उन्होंने मोहब्बत पर बेहतरीन शेर लिखे हैं.
जैसे सज्दे में क़त्ल हो कोई
ऐसा होता है चाहतों का मज़ा
गुज़र चुका है ज़माना विसाल करने का
ये कोई वक़्त है तेरे कमाल करने का
तेरी ही तरह आता है आँखों में तिरा ख़्वाब
सच्चा नहीं होता कभी झूटा नहीं होता
तेरे बग़ैर लगता है गोया ये ज़िंदगी
तन्क़ीद कर रही है मिरी ख़्वाहिशात पर
मैं बैठ गया ख़ाक पे तस्वीर बनाने
जो किब्र थे मुझ में वो तिरी याद से निकले
बहुत कुछ तुम से कहना था मगर मैं कह न पाया
लो मेरी डाइरी रख लो मुझे नींद आ रही है
'मोहसिन' बुरे दिनों में नया दोस्त कौन हो
है जिस का पहला क़र्ज़ उसी से सवाल कर
घर में रहना मिरा गोया उसे मंज़ूर नहीं
जब भी आता है नया काम बता जाता है
हम अपने ज़ाहिर ओ बातिन का अंदाज़ा लगा लें
फिर उस के सामने जाने की तय्यारी करेंगे
क्या ज़माना था कि हम ख़ूब जचा करते थे
अब तो माँगे की सी लगती हैं क़बाएँ अपनी
आँख से आँख मिलाना तो सुख़न मत करना
टोक देने से कहानी का मज़ा जाता है
तू ख़ुद भी जागता रह और मुझ को भी जगाता रह
नहीं तो ज़िंदगी को दूसरा क़िस्सा पकड़ लेगा