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नई दिल्ली : कांग्रेस के सीनियर लीडर पी चिदंबरम ने वज़ीरे आज़म मोदी के मैसेज को बेबुनियाद बताते हुए कहा कि दिए जलाना तो ठीक है मैं जला दूंगा लेकिन तब जब आप स्पेशलिस्ट और इकॉनॉमिस्ट के सलाह को सुनना भी उतना ही ज़रूरी है.साबिक वज़ीरे ख़जाना चिदंबरम ने कहा कि पीएम के इस पैग़ाम के बाद कारकुनान, कारोबारी और दिहाड़ी मज़दूर को निराशा हाथ लगी है.
Dear @narendramodi,
We will listen to you and light diyas on April 5. But, in return, please listen to us and to the wise counsel of epidemiologists and economists.— P. Chidambaram (@PChidambaram_IN) April 3, 2020
कांग्रेस के लीडर शशि थरूर ने भी पीएम की इस अपील पर निशाना साधते हुए कहा कि हमने प्रधान शोमैन को सुना. जिसमें उन्होंने इस दौर से गुज़र रहे लोगों के दर्द , उनके बोझ और फाइनांस के परेशानियों को कम करने के लिए कुछ बात नहीं कही गई, मुस्तबिल को लेकर कई नज़रिया नहीं रखा गया. यह हिंदुस्तान के फोटो अप वज़ीरे आज़म की ओर से पैदा किया गया फील गुड पल हैं.
Govt's earlier financial package was not adequate. A lot of people felt left out & marginalized. PM Modi has not addressed their needs. He has not dealt with lack of personal protective equipment & of rapid testing kits. Photo ops will not solve #COVID19 problem: Shashi Tharoor https://t.co/YuSsyTFHuv
— ANI (@ANI) April 3, 2020
अपने बयानों को लेकर चर्चा में रहने वाले समाजवादी पार्टी के एमपी एसटी हसन ने वज़ीरे आज़म मोदी को लेकर मुतनाज़ा बयान दिया है. 5 अप्रैल को पीएम मोदी की घरों में रोशनी की अपील पर सपा सांसद एसटी हसन ने तंज कसते हुए कहा ''पीएम मोदी किसी तांत्रिक के शिकंजे में फंसे हैं या फिर वो देश के लोगों को प्राथमिक स्कूल का बच्चा समझते हैं.''
बता दें कि पीएम मोदी ने कोरोना जैसी महामारी के खिलाफ लड़ाई में इत्तेहादी पॉवर के अहमियत को समझाने के लिए रिविवार पांच अप्रैल को मुल्क की आवाम से अपने घरों की बालकनी में खड़े रहकर नौ मिनट के लिए मोमबत्ती. दिया टॉर्ट या मोबाइल की फ्लैश लाइट जलाने की अपील की है्.
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