प्रणब मुखर्जी इकलौते ऐसे नेता जिन्होंने 5 बार पेश किया बजट, राष्ट्रपति बने और भारत रत्न भी मिला

प्रणब दा इकलौते ऐसे सियासत थे जिन्होंने 5 बार मुल्क का बजट पेश किया, सद्र जम्हूरिया भी बने और भारत रत्न से भी नवाज़े गए.

प्रणब मुखर्जी इकलौते ऐसे नेता जिन्होंने 5 बार पेश किया बजट, राष्ट्रपति बने और भारत रत्न भी मिला
फाइल फोटो

नई दिल्ली: हिंदुस्तान के साबिक सद्रे जम्हूरिया प्रणब मुखर्जी हमारे बीच नहीं रहे. उन्होंने 84 साल की उम्र में कल यानी 31 अगस्त को दिल्ली के रिसर्च एंड रेफरल अस्पताल में आखिरी सांस ली. गुज़िश्ता 10 अगस्त को उनकी कोरोना रिपोर्ट पॉजिटिव आई थी, जिसके बाद उन्हें अस्पताल में दाखिल कराया गया था. प्रणब दा एक हुनरमंद सियासतदान के तौर पर जाने जाते थे. उनकी ज़िंदगी से जुड़ी ऐसी खास बातें जो शायद आप नहीं जानते होंगे. प्रणब दा इकलौते ऐसे सियासत थे जिन्होंने 5 बार मुल्क का बजट पेश किया, सद्र जम्हूरिया भी बने और भारत रत्न से भी नवाज़े गए.

1. कलकत्ता के पोस्ट और टेलीग्राफ ऑफिस में अपर डिवीजन क्लर्क रहे. बाद में राजनीतिक विज्ञान के असिस्टेंट प्रोफेसर बने. राजनीति में आने से पहले वह 'देशर डाक' (मातृभूमि की पुकार) नाम की बंगाली पत्रिका के लिए सहाफत भी की.

2. प्रणब मुखर्जी को 1969 में उस वक्त की वज़ीरे आज़म इंदिरा गांधी सियासत में लाईं, उन्होंने ही मुखर्जी को राज्यसभा में मेंबर बनने के लिए सलाह दी थी.

3. प्रणब मुखर्जी (Pranab Mukherjee) 1975, 1981, 1993 और 1999 में फिर से राज्यसभा मेंबर मुंतखब किए गये. 

4. 1973 में वे मेहकमा सनअत के मरकज़ी नायब वज़ीर के तौर पर कैबिनेट में शामिल हुए. वह साल 1982 से 1984 तक कई कैबिनेट ओहदों के लिए मुंतखब किए जाते रहे और और साल 1984 में हिंदुस्तान के वज़ीरे खज़ाना मंत्री बने. एक सर्वे के मुताबिक साल 1984 में प्रणब मुखर्जी दुनिया के पांच सबसे बेहतरीन वुज़राए खज़ाना में से एक थे.

5. मनमोहन सिंह उनके वज़ीरे खज़ाना रहते रिजर्व बैंक के गवर्नर बने. बाद में प्रणब दा मनमोहन सिंह की मुद्दत में उनकी कैबिनेट में मंत्री रहे.

6. मुखर्जी को हिंदुस्तान का सबसे बहुमुखी प्रतिभा का राजनेता भी कहा जाता है. वह चार प्रमुख मंत्रालयों, रक्षा, वाणिज्य, विदेशी और वित्त को संभालने वाले एकमात्र मंत्री रहे.

7. 1984 में मुखर्जी को यूरोमनी पत्रिका द्वारा विश्व के सर्वश्रेष्ठ वित्त मंत्री बताया गया. वह सात बजट पेश करने वाले एकमात्र वित्त मंत्री रहे.

8. इंदिरा गांधी की हत्या के बाद लगभग पीएम बनने की कगार पर थे, लेकिन फिर राजीव गांधी को देश की बागडोर मिली.

9. इंदिरा गांधी के निधन के बाद, मुखर्जी ने कांग्रेस छोड़ दी और अपनी राजनीतिक पार्टी, राष्ट्रीय समाजवादी पार्टी बनाई. बाद में फिर कांग्रेस से जुड़ गए.

10. मनमोहन सिंह की दूसरी सरकार में मुखर्जी भारत के वित्त मंत्री बने. इस पद पर वे पहले 1980 के दशक में भी काम कर चुके थे. 6 जुलाई 2009 को उन्होंने सरकार का वार्षिक बजट पेश किया

11. प्रणब दा पूर्व-उदारीकरण और उदारीकरण के दोनों समय में वित्तमंत्री के तौर पर सेवाएं दी. 
भारत के 13 वें राष्ट्रपति के रूप में अपनी नियुक्ति के बाद मुखर्जी ने अफजल गुरु और कसाब सहित सात दया याचिकाओं को खारिज किया.

12. प्रणब मुखर्जी ने राष्ट्रपति रहते हुए 5 सितंबर शिक्षक दिवस के अवसर पर स्कूली बच्चों को भारत के राजनीतिक इतिहास के बारे में पढ़ाया. मुखर्जी ने नई दिल्ली के राष्ट्रपति भवन में एक सरकारी स्कूल के माध्यमिक छात्रों को भी पढ़ाया.

13. 2018 में प्रणब मुखर्जी आरएसएस के कार्यक्रम 'संघ शिक्षा वर्ग-तृतीय' में मुख्य अतिथि के रूप में शिरकत करने नागपुर गए थे. इस बात को जानकर खुद कांग्रेस नेता हैरान थे, लेकिन किसी ने खुल कर इस बारे में कुछ नहीं कहा था.

14. प्रणब मुखर्जी को कांग्रेस पार्टी का संकट मोचक के तौर भी जाना जाता था. वह साल 2012 में भी भारत के प्रधानमंत्री बनने के बेहद करीब थे.

15. प्रणब मुखर्जी एक मात्र ऐसे राजनेता हुए जो थे तो कांग्रेसी लेकिन उन्हें बीजेपी शासनकाल में भारत के सर्वोच्च सम्मान भारत रत्न से नवाजा गया था.

16. सबसे खास बात यह कि वो एक ऐसे कांग्रेसी नेता जो वित्तमंत्री रहे, देश के राष्ट्रपति बने और भारत रत्न से नवाजे गए. 

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