Professor Ali Khan Mahmudabad Bail: अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम जमानत मिल गई है. कोर्ट ने पहलगाम हमले और 'ऑपरेशन सिंदूर' पर टिप्पणी न करने की सख्त हिदायत दी है. मामले की जांच के लिए तीन सदस्यीय एसआईटी गठित की है.
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Ashoka University Professor Bail: अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को सुप्रीम कोर्ट ने बड़ी राहत दी है. कोर्ट ने प्रोफेसर को अंतरिम जमानत दे दी है. इसके साथ ही कोर्ट ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर को सख्त हिदायत भी दी है. सु्प्रीम कोर्ट ने जमानत देते हुए कहा कि पहलगाम आतंकी हमले या 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर कोई भी टिप्पणी नहीं करेंगे. अगर प्रोफेसर टिप्पणी करते हैं तो उसे जमानत की शर्त का उल्लंघन माना जाएगा और ऐसी स्थिति में अंतरिम जमानत स्वत: समाप्त हो जाएगी. इसके साथ ही कोर्ट ने तीन सदस्यों की एसआईटी बना दी है, जो इस मामले की जांच करेंगी और कोर्ट को अपनी जांच सौंपेगी.
जमानत देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद को नसीहत भी दी है. कोर्ट ने कहा कि आपको सस्ती लोकप्रियता पाने के लिए कुछ भी बोलने से बचना चाहिए. न्यायमूर्ति सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि अली खान महमूदाबाद तटस्थ और सरल भाषा का इस्तेमाल कर सकते थे ताकि दूसरे लोगों की भावनाएं आहत न हों.
प्रोफेसर को ऑपरेशन सिंदूर पर पोस्ट करना पड़ा भारी
हरियाणा की अशोका यूनिवर्सिटी के प्रोफेसर अली खान महमूदाबाद ने हाल ही में 'ऑपरेशन सिंदूर' को लेकर एक पोस्ट किया था, जिसपर जमकर विवाद हो गया था. विवाद इतना बड़ा कि प्रोफेसर को जेल जाना पड़ा. दरअसल, 8 मई को प्रोफेसर अली खान ने एक फेसबूक पोस्ट लिखा. पोस्ट में लिखा, "कर्नल सोफिया कुरैशी की तारीफ़ करते हुए इतने सारे दक्षिणपंथी टिप्पणीकारों को देखकर मुझे खुशी हो रही है. लेकिन शायद ये लोग मॉब लिंचिंग, मनमाने बुलडोजर और बीजेपी के नफ़रत फैलाने वाले लोगों के लिए भी इसी तरह आवाज़ उठा सकते हैं कि इन लोगों को भारतीय नागरिक के तौर पर सुरक्षा दी जानी चाहिए."
प्रोफेसर ने क्या लिखा था?
प्रोफेसर अली खान आगे लिखा, "दो महिला सैनिकों के ज़रिए सूचना देने का नज़रिया महत्वपूर्ण है. लेकिन इस नज़रिए को हकीकत में बदलना चाहिए, नहीं तो यह सिर्फ़ पाखंड है." हालांकि, प्रोफेसर अली खान ने अपनी इसी पोस्ट में भारत की विविधता की भी तारीफ़ की. उन्होंने लिखा, "आम मुसलमानों के लिए ज़मीनी हक़ीकत उससे अलग है जो सरकार दिखाने की कोशिश कर रही है. लेकिन साथ ही, यह प्रेस कॉन्फ्रेंस (कर्नल सोफिया और विंग कमांडर व्योमिका सिंह की प्रेस ब्रीफ़िंग) दिखाती है कि भारत अपनी विविधता में एकजुट है और एक विचार के तौर पर पूरी तरह से मरा नहीं है." प्रोफेसर अली खान ने अपनी पोस्ट के आखिर में तिरंगे के साथ 'जय हिंद' लिखा.