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नदीम अहमद: 2030 तक बिहार को यूरोपीय ममालिक के जैसा बनाने का ख़्वाब देखने और दिखाने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी को क्या आप जानते हैं? दरअसल ख़्वाब देखना और दिखाने में काफ़ी फ़र्क़ है और ये हकीकत से कहीं ज़्यादा दूर है. लेकिन ये भी सच है के तरक़्क़ी एक दिन में अचानक नहीं हो जाती बल्कि इसमें कई सालों की मेहनत और मशक़्क़त भी शामिल होती है. बिहार में असेंबली इंतेख़ाबात की तैयारियां शुरू हो चुकी है, तारीखों का ऐलान भी हो चुका है, कई तरह के इत्तेहाद भी बन चुके हैं. बिहार का ये पहला इलेक्शन है जिसमे पुष्पम प्रिया चौधरी नाम की एक ख़ातून लीडर अचानक सुर्ख़ियों में आगई जो सभी तरह के सोशल मीडिया पर अपनी मौजूदगी दर्ज करा रही हैं.
कौन है पुष्पम प्रिया चौधरी?
मार्च 2020 में अचानक एक दिन कई अख़बारों में इश्तेहार जारी कर के बिहार के सीएम ओहदे की उम्मीदवार के तौर पर चर्चा में आने वाली पुष्पम प्रिया चौधरी बिहार के दरभंगा ज़िले की रहने वाली हैं. पुष्पम प्रिया चौधरी भले ही सियासत में नई हो लेकिन ऐसा नहीं है के सियासत उन्हें विरासत में न मिली हो. हक़ीक़त ये है के वो जनता दल (यूनाइटेड) के लीडर और एमएलसी रह चुके विनोद चौधरी की बेटी हैं, इनके दादा उमाकांत चौधरी भी सियासी लीडर रहे हैं इसलिए इससे इंकार नहीं किया जासकता है के आज के दौर में वालिद के नाम पर बेटा या बेटी अगर सियासत में आये तो इसमें कोई चौंकने वाली बात होनी चाहिए. पुष्पम प्रिया चौधरी प्लूरल्स पार्टी की सद्र हैं. पुष्पम प्रिया चौधरी ने लंदन के मशहूर लंदन स्कूल ऑफ इकॉनमिक्स से पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन में मास्टर्स की डिग्री ली है इसके अलावा, पुष्पम ने इंग्लैंड के द इंस्टीट्यूट ऑफ डेवलपमेंट स्टडीज यूनिवर्सिटी से डेवलपमेंट स्टडीज में भी मास्टर्स की डिग्री ली है।
पुष्पम प्रिया चौधरी: सियासत की वजह
पुष्पम प्रिया चौधरी का कहना है के वो बिहार के बदलने आई हैं. उनका कहना है के बिहार में समाज को तालीमयाफ़्ता बनाने, गरीबी हटाने, रोज़गार देने, बेहतर सेहत देने, किसानों का भला करने,अपना हक मांगने जैसे मुद्दे हैं जिनपर वो काम करेंगी और बिहार को तरक़्क़ीयाफ़्ता रियासत बनाएंगी. सोशल मीडिया के मुताबिक़ पुष्पम ने लगभग उन सभी चीनी मिलों और पेपर मिलों का दौरा किया जो किसी ज़माने में बिहार के रोज़गार में अहम रोल अदा करता था. लेकिन क्या अब ये मुमकिन है के उन चीनी मीलों को दोबारा से ज़िंदा किया जाए ऐसा तो नहीं लगता है फिर भी पुष्पम की कोशिशों को नज़र अंदाज़ नहीं किया जासकता है. पुष्पम खुद कहती हैं के वो नितीश कुमार के अलावा किसी लीडर को फॉलो नहीं करती हैं. पुष्पम प्रिया चौधरी ने बिहार में चर्चा और शोहरत हासिल कर ली है। वह बिहार के हर जिलों का दौरा कर रही हैं और मक़ामी मुद्दों को उठाते हुए अवाम को बेदरा कर रही हैं।
क्या कामियाब होगी पुष्पम प्रिया चौधरी?
पुष्पम प्रिया चौधरी की पार्टी बिहार के हर सीट पर अपने उम्मीदवार उतारने की तैयारी में है. साफ़ सुथरे, पढ़े लिखे बेदाग़ उम्मीदवारों के भरोसे वो सियासी मैदान में उतरने जारही है. उनकी पार्टी का मुद्दा ज़ात और और मज़हब से ऊपर उठ कर सिर्फ़ तरक़्क़ी का है मगर बिहार जैसी रियासत में ऐसा हो पाना आसान तो नज़र नहीं आरहा है जहाँ ज़ात सिस्टम काफ़ी हावी है, लोग अपने बुनियादी ज़रूरत को भूल कर आज भी कास्ट फैक्टर में उलझे हुए हैं. यही वजह है के आज भी बिहार में कोई रोज़गार की बात नहीं करता और लाखों करोड़ों लोगों को अपनी रियासत छोड़कर दुसरे जगहों पर नक़ल मकानी करनी पड़ती है. ऐसे वक़्त में जहाँ 5 से ज़यादा तरह के इत्तेहाद बने हों ऐसे में पुष्पम प्रिया चौधरी पर अवाम का भरोसा कितना बढ़ेगा ये देखना सब से दिलचस्प होगा.
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