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Raghunathpur Muslim Vote Bank: बिहार में कोई भी चुनाव हो राज्य की सियासत में सीवान हमेशा सुर्खियों में रहता है. कभी दिवंगत पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन की राजनीति ने इस इलाके को राष्ट्रीय पहचान दी, तो कभी जातीय समीकरण ने विधानसभा से लेकर लोकसभा तक के चुनावी नतीजों को पलट कर रख दिया. इसी साल विधानसभा चुनाव होने हैं. इस बीच, सीवान जिले की रघुनाथपुर विधानसभा सीट इसलिए चर्चा में है क्योंकि दिवंगत पूर्व सांसद मोहम्मद शहाबुद्दीन के बेटे ओसामा साहब चुनावी मैदान में कूदने की तैयारी कर चुके हैं. माना जा रहा है कि ओसामा साहब यहां से राजद के टिकट पर चुनाव लड़ेंगे. इस ऐलान के बाद वोटरों का रुझान 2025 के विधानसभा चुनाव को बेहद दिलचस्प बना सकता है. ऐसे में आइए जानते हैं कि इस सीट पर क्या समीकरण बन रहे हैं और किस पार्टी के उम्मीदवार का पलड़ा भारी रहेगा?
कितने फीसद हैं मुस्लिम वोटर्स
रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में लगभग 3.08 लाख वोटर हैं. 2020 में मुस्लिम मतदाताओं की संख्या करीब 23 फीसद रही थी, जबकि यादव लगभग 9.6 फीसद और अनुसूचित जातियां 11.5 प्रतिशत के करीब थीं. यही समीकरण हर चुनाव को जटिल बना देता है.
राजद का दबदबा है बरकरार
1952 में बनी इस विधानसभा सीट पर अब तक 17 चुनाव हो चुके हैं. लंबे समय तक कांग्रेस यहां मजबूत रही और 8 बार जीत दर्ज की. इसके बाद जनता दल और जेडीयू जैसी पार्टियों ने भी एक-एक बार अपनी उपस्थिति दर्ज कराई. हालांकि पिछले दो चुनावों (2015 और 2020) में राजद के हरि शंकर यादव ने लगातार जीत हासिल कर इस सीट पर पार्टी का दबदबा बना दिया है. साल 2015 में उन्होंने 10,622 वोटों से जीत दर्ज की थी, वहीं 2020 में यह अंतर बढ़कर 17,965 तक पहुंच गया. उस समय एनडीए के भीतर लोजपा और जेडीयू दोनों ने उम्मीदवार उतारे, जिससे उनका वोट बैंक बंट गया और राजद को सीधा फायदा मिला.
शहाबुद्दीन फैक्टर और मुस्लिम वोट बैंक
सीवान की राजनीति की चर्चा शहाबुद्दीन के बिना अधूरी मानी जाती है. भले ही वह अब इस दुनिया में नहीं हैं, लेकिन उनकी राजनीतिक विरासत और असर आज भी मुस्लिम समाज में दिखता है. रघुनाथपुर जैसे क्षेत्रों में मुस्लिम वोटरों का झुकाव अक्सर राजद की तरफ देखा जाता है. इसकी वजह सिर्फ जातीय समीकरण नहीं, बल्कि शहाबुद्दीन के दौर से जुड़ी राजनीतिक निष्ठा भी है. 2024 के लोकसभा चुनाव में जब जेडीयू ने सीवान संसदीय सीट पर 92 हजार वोटों से जीत दर्ज की, तब भी रघुनाथपुर विधानसभा क्षेत्र में वह निर्दलीय उम्मीदवार हेना साहब से पीछे रह गई. यह संकेत है कि स्थानीय स्तर पर मुस्लिम वोटरों ने एनडीए को आसानी से स्वीकार नहीं किया.
जेडीयू की चुनौतियां
जेडीयू के लिए सबसे बड़ी समस्या यह है कि 2020 और 2024 दोनों चुनावों में रघुनाथपुर में पार्टी का प्रदर्शन कमजोर रहा. 2020 में जेडीयू तीसरे नंबर पर रही थी, बावजूद इसके कि उसने 26 हजार से ज्यादा वोट हासिल किए. दिलचस्प यह भी है कि ये वोट राजद की जीत के अंतर से ज्यादा थे, यानी अगर एनडीए एकजुट होता तो तस्वीर बदल सकती थी. हालांकि, मुस्लिम वोटरों को साधना NDA लिए सबसे कठिन काम होगा, क्योंकि शहाबुद्दीन की छवि और राजद के साथ उस समुदाय की भावनात्मक जुड़ाव अब भी कायम है.
राजद के मौजूदा विधायक ने किया ये ऐलान
दूसरी ओर, राजद के हरिशंकर यादव लगातार दो जीत के बाद आत्मविश्वास से भरे हुए हैं. यादव-मुस्लिम समीकरण के साथ दलितों और गरीब तबके का समर्थन उन्हें मज़बूत स्थिति में ला दिया है. अब हरिशंकर यादव ने भी ऐलान किया है कि अगर ओसामा साहब इस सीट से चुनाव लड़ते हैं, तो वे ओसामा साहब का पूरा समर्थन करेंगे. यानी साफ़ है कि राजद शहाबुद्दीन की विरासत का इस्तेमाल इस सीट को जीतने के लिए कर सकता है.