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नई दिल्ली: साबिक मरकज़ी वज़ीर रघुवंश प्रसाद सिंह का इतवार के रोज़ 74 साल की उम्र में दिल्ली एम्स में इंतेकाल हो गया. उन्हें सांस लेने में तकेलीफ के चलते एम्स में भर्ती कराया गया था. रघुवंश राष्ट्रीय जनता दल के चीफ लालू प्रसाद यादव के करीबी नेताओं में से एक थे और उन्होंने हाल ही में राजद से इस्तीफा दिया था. जानकारी के मुताबिक 10 सितंबर को उन्होंने अस्पताल के बेड से ही राजद प्रमुख लालू यादव को इस्तीफा भेज था.
सियासत में आने से पहले मैथ पढ़ाते
रघुवंश प्रसाद सिंह सियासत में आने से पहले मैथ (गणित) पढ़ाते थे. बिहार यूनिवर्सिटी से उन्होंने डॉक्टरेट की डिग्री ली और साल 1969 से 1974 तक सीतामढ़ी के गोयनका कॉलेज में प्रोफेसर के तौर काम करते रहे. मैथ के प्रोफेसर डॉ. रघुवंश प्रसाद सिंह नौकरी के तहरीक (आंदोलन) में सरगरम रहे और कई बार जेल भी गए.
कई बार जाना पड़ा जेल
अपने आंदोलनों के चलते रघुवंश कई बार जेल भी गए. पहली बार 1970 में रघुवंश प्रसाद शिक्षक आंदोलन के दौरान जेल गए. साल 1973 में संयुक्त सोशलिस्ट पार्टी के आंदोलन के दौरान भी वह जेल गए. साल 1974 के जेपी आंदोलन में रघुवंश प्रसाद सिंह ने हिस्सा लिया. इस वक्त मरकज़ और बिहार में कांग्रेस पार्टी हुकूमत थी. बिहार हुकूमत ने जेल में बंद रघुवंश प्रसाद सिंह को प्रोफेसर के ओहदे से बर्खास्त कर दिया. इस बाद रघुवंश प्रसाद सिंह ने दोबारा पीछे मुड़कर नहीं देखा और कर्पूरी ठाकुर, जय प्रकाश नारायण के रास्ते पर चल पड़े.
बेदाग और ईमानदार लीडर
रघुवंश प्रसाद सिंह की शिनाख्त एक बेदाग और ईमानदार लीडर के तौर पर होती रही है. अपने सियासी ज़िंदगी में रघुवंश प्रसाद सिंह ने कई ऐसे काम किए, जो मिसाल बन गए, चाहे वह मनरेगा और नरेगा हो या फिर मुल्क में हर जगह सड़क पहुंचाने का काम, रघुवंश बाबू के काम की चर्चा हमेशा होती रही.
सभी पार्टियों के साथ अच्छे रिश्ते
सबसे खास बात यह रही कि उनके पार्टियों के साथ अच्छे रिश्ते रहे हैं. बीते दिनों जब वह बीमार थे तो पीएम नरेंद्र मोदी (Narendra Modi) ने उन्हें फोनकर हालचाल जाना था. साथ ही जेडीयू चीफ और बिहार के सीएम नीतीश कुमार भी कई बार आम मंचों से रघुवंश प्रसाद सिंह की तारीफ कर चुके हैं.
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