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शरीफ उद्दीन अहमद/गुवाहाटी: असम के एक चाय विक्रेता ने पहली ही कोशिश में नीट उत्तीर्ण कर एम्स-दिल्ली में सीट हासिल की है. राज्य के बजली जिले के निवासी 24 वर्षीय राहुल दास के लिए अपनी मां द्वारा संचालित दुकान में ग्राहकों को चाय परोसना और इसके साथ ही पढ़ाई करना कोई आसान काम नहीं था लेकिन उन्होंने इन चुनौतियों का सामना किया और अपना लक्ष्य प्राप्त करने में सफल रहे.
दास और उनके भाई का लालन-पालन उनकी मां ने किया, जो करीब 11 साल पहले अपने दो बेटों की देखभाल के लिए अकेली रह गई थीं. गरीबी ने दास को 12वीं कक्षा के बाद पढ़ाई छोड़ने के लिए मजबूर किया, लेकिन उन्होंने डॉक्टर बनने का सपना नहीं छोड़ा. दास ने कहा कि वह जिले के पटाचरकुची चौक इलाके में अपनी मां की दुकान पर ग्राहकों की सेवा करने के बीच पढ़ाई के लिए समय निकालते थे.
उन्होंने कहा, "मैंने अपनी माँ को हमारे लिए कड़ी मेहनत करते देखा है. हम दुकान पर एक सहायक नहीं रख सकते थे. मैं किसी न किसी तरह से उनकी मदद करता. मैंने चाय बनाई और बेची. जब भी संभव होता, मैं दुकान में पढ़ने के लिए बैठ जाता." दास ने वर्ष 2015 में बारहवीं की परीक्षा पास की थी और फिर पैसों के अभाव में पढ़ाई छोड़ दी थी. हालांकि, उच्च शिक्षा के लिए उत्साह के चलते दो साल बाद दास प्लास्टिक इंजीनियरिंग में डिप्लोमा करने के लिए सेंट्रल इंस्टिट्यूट ऑफ पेट्रोकेमिकल्स इंजीनियरिंग एंड टेक्नोलॉजी पहुंच गए.
दास ने तीन साल बाद विशिष्ट योग्यता (85 प्रतिशत अंक) के साथ इस पाठ्यक्रम में सफलता हासिल की और गुवाहाटी में एक बहु-राष्ट्रीय कंपनी में 'क्वालिटी इंजीनियर' के रूप में अक्टूबर 2020 में कोविड महामारी के बीच नौकरी शुरू की.
दास के एक हाथ को जलने से नुकसान पहुंचा था. उन्होंने कहा कि नीट में उन्हें 12,068 वां स्थान मिला है, लेकिन उनके अनुसूचित जाति और दिव्यांगता प्रमाणपत्रों ने उन्हें अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान (एम्स) में प्रवेश दिलाने में मदद की. उन्होंने उन सभी का आभार व्यक्त किया, जिन्होंने परिवार की जरूरत के समय में आर्थिक या अन्य माध्यमों से मदद की.
दास ने कहा कि, "हम जिला उपायुक्त भारत भूषण देवचौधरी के आवास के पास के परिसर में रहते हैं. उन्होंने कई तरह से हमारी मदद की है. असम के मंत्री रंजीत कुमार दास ने दो दिन पहले हमारी दुकान का दौरा किया और तत्काल जरूरत के लिए मुझे 10,000 रुपये दिए."
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