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रजाउल्लाह/जयपुर: राजस्थान मदरसा बोर्ड और उर्दू अकादमी के चेयरमैन का पद खाली है. इन दिनों पदों की जिम्मेदारी किन्हें दी जाएगी, अभी इसका भी फैसला नहीं हो पाया है और सरकार इसमें उलझी हुई है. सरकार को उलझने की वजह से अल्पसंख्यक तबके को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है.
दरअसल, दोनों ही बड़े विभागों में चेयरमैन नहीं होने की वजह से किसी तरह के कोई बड़े फैसले अल्पसंख्यक लोगों के लिए नहीं लिए जा रहे हैं. बड़ी बात यह है कि राजस्थान सरकार को 3 बरस का लंबा अरसा मुकम्मल हो चुका है लेकिन अभी तक किसी तरह से कोई चेयरमैन ने तो राजस्थान मदरसा बोर्ड के लिए बनाया गया है और ना ही उर्दू अकादमी के लिए बनाया गया है.
गौरतलब है कि कई बार राजस्थान सरकार के खिलाफ इस पूरे मामले को लेकर बड़े प्रदर्शन भी हो चुके हैं, लेकिन अब सरकार के कान में जूं तक नहीं रैंगी है. फिलहाल जिस तरह से पिछले काफी दिनों से अल्पसंख्यक विभागों में चेयरमैन बनाने का दौर जारी है उसके मद्देनजर यही कहा जा सकता है कि जल्द ही राजस्थान मदरसा बोर्ड और राजस्थान उर्दू अकादमी में चेयरमैन नजर आ सकता है, लेकिन राजस्थान मदरसा बोर्ड में अगर किसी विधायक को चेयरमैन बनाया जाता है तो कांग्रेस के मुस्लिम फ्रंट में काभी खींच तान हो रही है.
आंदोलनकारी है मदरसा पैरा टीचर
वहींद दूसरी तरफ खुद को नियमित करने की मांग को लेकर राजस्थान मदरसा पैराटीचर पिछले काफी लंबे समय से आंदोलनकारी हैं, 3 सालों में कई बार राजस्थान मदरसा बोर्ड कार्यालय के सामने भी इन तमाम लोगों की तरफ से धरना प्रदर्शन किया गया. धरना प्रदर्शन के दौरान चंद लोगों को पुलिस की तरफ से हिरासत में भी ले लिया गया था, लेकिन मदरसा बोर्ड का चेयरमैन नहीं होने की वजह से लोगों की समस्या का समाधान अभी तक नहीं निकल सका है, ऐसे में राजस्थान मदरसा पैराटीचर भी जल्द ही राजस्थान मदरसा बोर्ड में चेयरमैन बनाने की मांग राजस्थान सरकार से करते हुए नजर आ रहे हैं.
उर्दू अकादमी भी राम भरोसे
वहीं राजस्थान उर्दू अकादमी भी राजधानी जयपुर के झालाना स्थित कार्यालय में दो या तीन कमरों में संचालित हो रही है, इस बड़े विभाग में भी अभी तक राजस्थान सरकार की तरफ से कोई चेयरमैन नहीं बनाया गया है इसलिए उर्दू से मोहब्बत करने वाले लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। परेशान हो रहे लोगों का कहना है कि जल्द से जल्द अगर चेयरमेन में नहीं बनाया गया तो सरकार को खामियाजा भुगतना पड़ सकता है.
ये है वजह
जानकारी के मुताबिक, राजस्थान की कांग्रेस सरकार दो गुटों में बंटी हुई नजर आ रही है, जिनमें एक गुट टोंक से विधायक सचिन पायलट का है और दूसरा गुट अशोक गहलोत का है, इन दोनों ही खेमों में अगर किसी एक खेमे के आदमी को तवज्जो देकर चेयरमैन बना दिया जाता है तो यहां पर विरोध होना लाजमी है, मदरसा बोर्ड चेयरमैन के तौर पर बसपा से कांग्रेस में शामिल होने वाले विधायक वाजिब अली का नाम लगभग तय माना जा रहा है, लेकिन टोंक विधानसभा से ताल्लुक रखने वाले कांग्रेसी नेता सऊद सईदी का नाम भी पायलट खेमे की तरफ से आगे किया जा रहा है, ऐसे में इसी उलझन में अभी चेयरमैन के नामों का ऐलान नहीं किया गया है.
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