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Zee SalaamZee Salaam ख़बरेंरमजान का चांद देखते ही मुसलमान लेते हैं ये 5 संकल्प; रमजान के माह से करते हैं बेइन्तहा मोहब्बत

रमजान का चांद देखते ही मुसलमान लेते हैं ये 5 संकल्प; रमजान के माह से करते हैं बेइन्तहा मोहब्बत

Muslims Prayer after Ramadan Moon Sighting: सऊदी अरब में हिलाल देखे जाने के बाद भारत समेत कई देशों में रमजान की तैयारियां तेज हो गई हैं. भारत में उलेमा और हिलाल कमेटियां चांद देखने की कोशिश करेंगी. चांद नजर आते ही रोजों की नीयत, तरावीह की शुरुआत और इबादतों का सिलसिला शुरू हो जाएगा, जिससे रूहानी माहौल बन जाता है. चांद देखने के बाद मुसलमान खास दुआ पढ़ते हैं. आइये जानते हैं डीटेल?

 

 

रमजान का चांद देखने की दुआ (प्रतीकात्मक एआई तस्वीर)
रमजान का चांद देखने की दुआ (प्रतीकात्मक एआई तस्वीर)

Ramadan Moon Sighting India: सऊदी अरब में हिलाल देखे जाने की पुष्टि के बाद भारत समेत कई मुल्कों में रमजान की तैयारियां शुरू हो गई है. बुधवार (18 फरवरी) को भारत में भी उलेमा, हिलाल कमेटिया और आमो-खास लोग रमजान का चांद देखने की कोशिश करेंगे. चांद देखने को लेकर अभी से तैयारियां शुरू हो गई हैं. आज शाम मस्जिदों के मीनारों, घरों की छतों और खुले मैदानों में एक ही सवाल गूंजता है, क्या आज रमजान का चांद नजर आया? 

भारत समेत दुनिया भर के मुसलमानों के लिए यह सिर्फ एक खगोलीय लम्हा नहीं, बल्कि इबादत, सब्र और रहमत के महीने की औपचारिक दस्तक है. चांद दिखते ही मुसलमानों की जिंदगी की रफ्तार बदल जाती है. नियतें बंधती हैं, दुआएं उठती हैं और एक पाक सफर की शुरुआत होती है. इस्लामिक कैलेंडर के मुताबिक, हिजरी माह की शुरुआत चांद से होती है. इसी के तहत रमजान के रोजे का आगाज और समाप्ति भी चांद देखकर ही होती है.

चांद देखते ही मुसलमान क्या करते हैं?
ऐसे में सवाल उठता है कि रमजान का चांद देखने के बाद मुसलमान क्या करते हैं? रमजान का चांद नजर आते ही सबसे पहला अमल दुआ है. मोहम्मद सल्लल्लाहु अलैहि वसल्लम से साबित है कि चांद देखकर यह दुआ पढ़ी जाए, "अल्लाहुम्मा अहिल्लहु अलैना बिल-अम्ने वल-ईमान, वस्सलामति वल-इस्लाम, रब्बी वा रब्बोकल्लाह (اے اللہ ! آپ ہمیں امن و ایمان ، سلامتی اور اسلام کا چاند دیکھائیے اور اے چاند ! میرا اور تیرا رب اللہ ہی ہے) ." जिसके मायने हैं, "ऐ अल्लाह! आप हमें अमन व ईमान, सलामती और इस्लाम का चांद दिखाइए, और ऐ चांद! मेरा और तुम्हारा रब अल्लाह ही है."

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रोजों की नीयत और ऐलान
रमजान का चांद दिखते ही अगले दिन से रोजा रखने की नीयत की जाती है. इस्लाम में नीयत मजबूत इरादे, तकवा, इबादत, बंदगी, आत्मसंयम, सब्र और अल्लाह के बनाई मखलूक के प्रति हमदर्दी और प्रेम को दर्शाना है. साथ ही रोजे के जरिये अल्लाह की दी ही नेमतों का शुक्रिया अदा करना है. नियत के लिए अलग से ऊंची आवाज में कहना जरूरी नहीं है. मस्जिदों में रमजान के आगाज का ऐलान होता है, जिससे रोजों, तरावीह और सहरी-इफ्तार का सिलसिला शुरू हो जाता है. इसी के साथ क़ुरआन की तिलावत, सदका और नेकी के कामों का इरादा मजबूत किया जाता है. 

रमजान का चांद देखने का एहतमाम मुस्लिम समाज में एक खास और रूहानी माहौल के साथ किया जाता है. इस दिन लोग बेसब्री से नए चांद के दीदार का इंतजार करते हैं, क्योंकि इसी के साथ पाक महीने रमजान की शुरुआत तय होती है. चांद देखने के लिए अलग-अलग जगहों पर रुयत-ए-हिलाल कमेटियां बनाई जाती हैं, जिनमें उलमा, धार्मिक विद्वान और अनुभवी लोग शामिल होते हैं. ये कमेटियां इस बात का ध्यान रखती हैं कि चांद देखने की प्रक्रिया सही और भरोसेमंद तरीके से पूरी हो.

शाम ढलते ही लोग खुली जगहों, मस्जिदों की छतों, मैदानों और ऊंचे स्थानों पर जमा होकर आसमान में नए चांद की तलाश करते हैं. यह पल सिर्फ धार्मिक ही नहीं, बल्कि सामूहिक उत्साह और भाईचारे का भी प्रतीक होता है. जब किसी शख्स को चांद नजर आता है, तो वह अपनी गवाही पेश करता है. इस गवाही को संबंधित कमेटियां और धार्मिक विद्वान जांच परख कर स्वीकार करते हैं, ताकि ऐलान पूरी तरह प्रमाणिक हो. चांद दिखने की पुष्टि होते ही मस्जिदों के लाउडस्पीकर, मीडिया चैनलों और सोशल मीडिया के जरिए रमजान के आगाज का ऐलान किया जाता है. इसके साथ ही तरावीह की नमाजा और इबादतों का सिलसिला शुरू हो जाता है, और माहौल रूहानियत से भर उठता है.

कुरआन और हदीस की रौशनी में
इस्लाम में रमजान की शुरुआत चांद देखने से जुड़ी हुई है. हदीस शरीफ में साफ हुक्म मिलता है कि "चांद देखकर रोजा रखो और चांद देखकर ही इफ्तार करो." यह उसूल मुसलमानों को खगोलीय गणना से ज्यादा प्रत्यक्ष गवाही और यकीन पर अमल करना सिखाता है, जिससे इबादत में भरोसा और दिली इत्मीनान कायम रहता है. चांद का दीदार सिर्फ एक संकेत नहीं, बल्कि अल्लाह की तरफ से एक रूहानी पैगाम माना जाता है, जो नए महीने की शुरुआत का ऐलान करता है.

रमजान का चांद सिर्फ इबादत की शुरुआत नहीं, बल्कि समाजी एकता और भाईचारे का भी प्रतीक है. इस महीने में अमीर और गरीब, हर तबके के लोग एक साथ रोजा रखते हैं और इबादत में शामिल होते हैं. मस्जिदें आबाद होती हैं, तरावीह की नमाजें अदा की जाती हैं और जकात व फित्रा के जरिये जरूरतमंदों तक मदद पहुंचाई जाती है. चांद की यह पहली झलक पूरे समाज में रहमत, सब्र और इंसानियत का एहसास जगाती है.

यह भी पढ़ें: सऊदी में चांद का दीदार होते ही रमजान का आगाज, भारत में 19 फरवरी को रखा जाएगा पहला रोजा?

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Raihan Shahid

रैहान शाहिद का ताल्लुक उत्तर प्रदेश के सिद्धार्थनगर ज़िले से हैं. वह पिछले पांच सालों से दिल्ली में सक्रिय रूप से पत्रकारिता के क्षेत्र में कार्यरत हैं. Zee न्यूज़ से पहले उन्होंने ABP न्यूज़ और दू...और पढ़ें

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