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मॉब लिंचिंग पर SC ने सुनवाई करने से क्यों किया इंकार? जाने पूरा मामला

Supreme court on Mob Lynching: सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिंग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दी है. पूरी खबर जानने के लिए नीचे स्क्रॉल करें

मॉब लिंचिंग पर SC ने सुनवाई करने से क्यों किया इंकार? जाने पूरा मामला

Supreme court on Mob Lynching: भारत में मॉब लिंचिंग एक बड़ी मुसीबत बन चुकी है. आए दिन देश के अलग अलग जगहों से मॉब लिंचिंग की खबर सामने आती रहती हैं. बुधवार 11 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने मॉब लिंचिग से जुड़ी एक याचिका को खारिज कर दिया. यह याचिका जस्टिस भूषण रामकृष्ण गवई और जस्टिस के विनोद चंद्रण के संयुक्त बेंच के सामने गई थी. सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर कहा कि दिल्ली में बैठ कर देश भर में हो रही मामलों की मोनिटरिंग नहीं हो सकती है. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट का रुख करने की सलाह दे दी है. 

मॉब लिंचिंग से जुड़ी याचिका पर सुनवाई से इंकार

गौरतलब है कि देश भर में गौ रक्षा दल मनमाने तरीके से काम कर रहे हैं. साथ ही हिंदूवादी संगठनो पर भी मॉब लिंचिंग का इल्जाम लगते रहे हैं. ऐसे में एक याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट में PIL दायर कर मॉबलिंचिंग पर सुनवाई करने और पिड़ित परिवारों को एक मुआवजा सेट करने की अपील की थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने इस याचिका पर सुनवाई करने से मना कर दिया और याचिकाकर्ता को हाई कोर्ट जाने की सलाह दे दी. 

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लिंचिंग को गंभीरता से नहीं ले रही है सरकार

याचिका में राज्य सरकार पर इल्जाम लगाते हुए कहा गया था कि राज्य सरकार मॉब लिंचिंग से जुड़े मामले को गंभीरता से नहीं ले रही है. याचिका में असम, छतीसगढ़, ओडिशा, महाराष्ट्र और तेलंगाना का जिक्र करते हुए कहा गया था कि इन राज्यों में लगातार मॉब लिंचिंग की घटनाएं बढ़ रही है. याचिका में गौरक्षकों के खिलाफ प्रशासन की नर्म कार्रवाई का इल्जाम लगाया गया था. इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अगर प्रशासन कठोर कार्रवाई नहीं करता है तो इस मामले को लोअर कोर्ट या हाई कोर्ट में ले जा सकते हैं. 

सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइन

सरकार के तरफ से इस याचिका पर जवाब देने के लिए सॉलिसिटर जनरल तुशार मेहता मौजूद थें. उन्होंने कहा कि हम हर राज्य के मामले पर जवाब नहीं दे सकते. साथ ही उन्होंने कहा कि सुप्रीम कोर्ट पहले ही मॉब लिंचिंग पर क्लियर गाइडलाइन जारी कर चुका है. सॉलिसिटर जनरल तुशार मेहता ने कहा कि सरकार के तरफ से पिछले साल नाफिज़ की गई न्याय संहिता में भी मॉब लिंचिंग को क्राइम माना गया है.

गौरतलब है कि साल 2018 में सुप्रीम कोर्ट वाजेह तौर पर मॉब लिंचिंग के खिलाफ गाइडलाइन जारी कर चुकी है. साथ ही लगभग उत्तर प्रदेश समेत 13 राज्यों में मॉब लिंचिंग के खिलाफ कानून बन चुके हैं. लेकिन सवाल है कि इन सब कानून और गाइडलाइन के बावजूद मॉब लिंचिंग की घटनाए कम क्यों नहीं हो रही हैं.

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