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नई दिल्ली: नए कृषि कानूनों को लेकर बीजेपी की साथी पार्टियां एक-एक कर अलग होती जा रही हैं. एनडीए की दूसरी सबसे पुरानी साथी अकाली दल के बाद आरएलपी ने भी एनडीए से अलग होने का ऐलान कर दिया है. पार्टी के कनवीनर और नागौर से एमपी हनुमान बेनीवाल ने इसका ऐलान किया है.
आरएलपी चीफ का कहना है कि मरकजी हुकूमत जिस तरह से कृषि कानून वापस न लेने पर अड़ी हुई है वह गलत है. ये तीनों बिल किसान के खिलाफ हैं इसलिए वे एनडीए से अलग हो रहे हैं. इस मौके पर उन्होंने दो लाख किसानों के साथ दिल्ली कूच करने का भी दावा किया.
मरकजी हुकूमत से टकराव के बीच यूनाईटेड किसान तंजीम ने हुकूमत के साथ 29 दिसम्बर को बात-चीत का प्रस्ताव रखा है. हालांकि इस खत में भी किसान कृषि कानून के तीन बिलों को रद्द करने की मांग दोहराई है.
याद रहे कि पार्लियामेंट के दोनों हाउसों में पास होने के दौरान भी जमकर हंगामा हुआ था. जिसे लेकर अपोजिशन और किसान संगठनों ने राष्ट्रपति से भी गुहार लगाई थी. अपनी कोशिशों में नाकाम होते देख पंजाब के किसानों ने आंदोलन शुरू कर दिया. पहले ये आंदोलन रियासती पैमाने (राज्य स्तर) पर शुरू हुआ जो बाद में मुल्कगीर बन गया.
कृषि कानून को लेकर पंजाब की नाराजगी को देखते हुए अकाली दल बादल ने एनडीए से अलग होने का ऐलान किया था. पार्टी के NDA से अलग होने के ऐलान से पहले अकाली दल की वाहिद मरकजी वजीर हरसिमरत कौर ने मोदी कैबिनेट से इस्तीफा दे दिया था.
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