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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि रोहिंग्या मुसलमानों के बच्चे दाखिले के लिए सरकारी स्कूलों से राबता कर सकते हैं, और इनकार किए जाने की स्थिति में वे सीधे हाईकोर्ट का रुख कर सकते हैं.
जस्टिस सूर्यकांत और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने दिल्ली सरकार के अफसरों को यूएनएचसीआर (शरणार्थियों के लिए संयुक्त राष्ट्र उच्चायुक्त) कार्ड रखने वाले रोहिंग्या बच्चों को सरकारी स्कूलों में दाखिला देने का निर्देश देने की मांग वाली याचिका का निपटारा करते हुए ये आदेश दिया है. एनजीओ 'रोहिंग्या ह्यूमन राइट्स इनिशिएटिव' की जानिब से पेश वकील कॉलिन गोंजाल्विस से बेंच ने कहा, "हम चाहते हैं कि बच्चे पहले सरकारी स्कूलों से राबता करें. अगर उन्हें वहां दाखिला नहीं दिया जाता है, तो वे हाईकोर्ट जा सकते हैं." बेंच ने कहा, "वह वही आदेश पास कर रही है, जो उसने रोहिंग्या बच्चों के समान मुद्दे को उठाने वाली पहले की जनहित याचिका पर पास किया था. हम चाहते हैं कि बच्चे पहला कदम उठाएं." 12 फरवरी को टॉप अदालत ने कहा था कि तालीम हासिल करने में किसी भी बच्चे के साथ भेदभाव नहीं किया जाएगा.
दिल्ली में इस इलाके में रहते हैं रोहिंग्या
गौरतलब है कि एक याचिका में केंद्र और दिल्ली सरकार को शहर में रोहिंग्या शरणार्थियों को सरकारी स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंच देने का निर्देश देने की मांग की गई थी. वकील गोंजाल्विस ने कहा था कि एनजीओ ने रोहिंग्या शरणार्थियों के लिए सरकारी स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंच की मांग की थी, क्योंकि उनके पास आधार कार्ड न होने की वजह से उन्हें इन सुविधाओं से महरूम कर दिया गया था. उन्होंने कहा था, "वे शरणार्थी हैं जिनके पास यूएनएचसीआर कार्ड हैं, और उनके पास आधार कार्ड नहीं हो सकते. लेकिन आधार के अभाव में उन्हें सरकारी स्कूलों और अस्पतालों तक पहुंच नहीं दी जा रही है." गोंजाल्विस ने कहा था कि रोहिंग्या शरणार्थी दिल्ली के शाहीन बाग, कालिंदी कुंज और खजूरी खास इलाकों में रहते हैं. शाहीन बाग और कालिंदी कुंज में वे झुग्गियों में रहते हैं, जबकि खजूरी खास में वे किराए के मकान में रहते हैं. "
अदालत ने रोहिंग्या शरणार्थियों को दी सरकारी सुविधाओं तक पहुँच
शीर्ष अदालत ने पहले इन शरणार्थियों के रहने वाले इलाके और उनके विवरण के बारे में जानकारी मांगी थी. 31 जनवरी को बड़ी अदालत ने एनजीओ से अदालत को यह बताने के लिए कहा था कि रोहिंग्या शरणार्थी शहर में कहां बसे हैं, और उन्हें कौन-कौन सी सुविधाएं अभी मिल रही हैं. इसने वकील गोंजाल्विस से दिल्ली में उनके बसने के मकामों की जानकारी देते हुए हलफनामा दाखिल करने को भी कहा था . मुल्क की सबसे बड़ी अदालत ने कहा था कि उसने यह समझने के लिए सवाल पूछे थे कि क्या वे शिविरों में रहते हैं, क्योंकि राहत की प्रकृति जनहित याचिका में नहीं बताया गया है. जनहित याचिका में अफसरों को यह निर्देश देने की मांग की गई है कि वे सभी रोहिंग्या बच्चों को आधार कार्ड की परवाह किए बिना मुफ्त में दाखिला दें और उन्हें सरकार द्वारा पहचान पत्र पर जोर दिए बिना कक्षा 10वीं और 12वीं तथा स्नातक सहित सभी परीक्षाओं में भाग लेने की इज़ाज़त दें. जनहित याचिका में रोहिंग्या परिवारों को सभी सरकारी लाभ जैसे सरकारी अस्पतालों में मुफ्त स्वास्थ्य सेवाएं, अंत्योदय अन्न योजना के तहत उपलब्ध सब्सिडी वाले खाद्यान्न और खाद्य सुरक्षा अधिनियम के तहत अन्य नागरिकों की तरह लाभ प्रदान करने की भी मांग की गई है, चाहे उनकी नागरिकता कुछ भी हो.
500 छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला मिलने का रास्ता साफ़
बेंच के इस आदेश के बाद वकील गोंजाल्विस ने कहा, "अदालत अपने फैसल में अपना निर्देश दर्ज कर सकती है, जिससे 500 छात्रों को सरकारी स्कूलों में दाखिला मिलने का रास्ता साफ़ होगा." उन्होंने कहा, "मैं 2018 से इस मुद्दे के लिए लड़ रहा हूं और अब अदालत के एक सीधे हुक्म से 500 छात्रों को स्कूलों में दाखिला मिलेगा."
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