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नई दिल्ली: रूस और यूक्रेन के बीच जंग जारी है. जानकारी के मुताबिक अभी तक यूक्रेन के 40 से ज्यादा जवान मारे गए हैं. इस सब के बीच नाटो का नाम सामने आ रहा है. नाटो के पूर्व उप सर्वोच्च सहयोगी कमांडर जनरल सर एड्रियम ब्रैडशॉ का कहना है कि अगर रूस के सैनिक नाटो के इलाकों में कदम रखा तो इसके सदस्य रूस के खिलाफ युद्ध की शुरूआत कर देंगे. ऐसे में कई लोगों के मन में सवाल है कि आखिर ये नाटो क्या है और इसका काम क्या है?
क्या है नाटो?
नाटो यानी उत्तर अटालांटिक संधि संगठन (NATO- North Atlantic Treaty Organization). यह एक उत्तरी अमेरिका और यूरोपीय देशों का संगठन है. इस संगठन की स्थापना 1949 में हई थी. फिलहाल इस संगठन के 30 देश सदस्य हैं. नाटो का मकसद अपने सदस्यों को राजनैतिक और सैन्य ज़रियों से सुरक्षा देना है.
क्या काम करता है नाटो?
इसमें शामिल देशों के लिए सुरक्षा का प्रावधान है. इसके तहत अगर कोई बाहरी देश इस संगठन के किसी भी सदस्य देश पर हमला करता है तो बाकि देश मिलकर उसकी हिफाजत करेंगे. आपको बता दें यूक्रेन नाटो का सदस्य नहीं है. इसी लिए यह संगठन सीधे तौर पर यूक्रेन की मदद नहीं कर सकता है. हालांकि मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक अमेरिका, कैनेडा और ब्रिटेन सीधे तौर पर यूक्रेन की मदद कर रहे हैं.
कैसे बना नाटो?
सन 1939 और 1945 के बीच दूसरा विश्व युद्ध हुआ. जिसके बाद दुनिया दो भागों में बट गई. उस वक्त दुनिया में दो सूपर पावर थे पहला अमेरिका और दूसरा सोवियत संघ. वॉर खत्म होने पर सोवियत संघ को पूर्वी यूरोप सेना हटानी थी लेकिन उसने ऐसा नहीं किया. जिसके बाद सोवियत संघ ने बर्लिन को भी घेर लिया. सोवियत संघ की विस्तारवादी नीति को रोकने के लिए 1949 में अमेरिका ने नाटो की शुरूआत की.
शुरूआत में नाटो में केवल अमेरिका ब्रिटेन, बेल्जियम, कनाडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, नॉर्वे जैसे 12 सदस्य देश थे. लेकिन अब इस संगठन के सदस्यों की तादादा 30 है. इस संगठन का सबसे नया सदस्य नॉर्थ मैसेडोनिया है.
कैनसे देश हैं नाटो में?
बेल्जियन, कैनेडा, डेनमार्क, फ्रांस, आइसलैंड, इटली, लक्समबॉर्ग, नीदरलैंड, नॉर्वे, पुर्तगाल, यूके, यूएस, ग्रीस, तुर्की, जर्मनी, स्पेन, चेक गणतंत्र, हंगरी, पॉलैंड, बलगैरिया, इस्टोनिया, लातविया, इथुआनिया, रोमानिया, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया, अल्बानिया और क्रोएशिया, मोंटेनेग्रो और उत्तरी मैसेडोनिया.