Sadhvi Prachi on Sir Syed Ahmed Khan: साध्वी प्राची ने AMU संस्थापक सर सैयद अहमद खान को अंग्रेजों का चाटुकार बताते हुए एएमयू की 99 साल की लीज पर ली गई जमीन को लेकर बड़ा बयान दिया है. उन्होंने नगर निगम और वक्फ बोर्ड की जमीन पर एएमयू के अवैध कब्जे का भी आरोप लगाया. जानिए क्या है पूरा विवाद.
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Sadhvi Prachi on Sir Syed Ahmed Khan: अलीगढ़ के बन्ना देवी थाना क्षेत्र के बापू धाम कॉलोनी में एक कार्यक्रम का आयोजन किया गया. इस कार्यक्रम में अपने विवादित बयानों के लिए मशहूर फायरब्रांड हिंदू नेत्री साध्वी प्राची ने AMU के संस्थापक सर सैयद अहमद खान पर विवादित बयान दिया, जिससे भारी बवाल मच सकता है.
दरअसल,हिंदू नेता साध्वी प्राची ने AMU के संस्थापक सर सैयद अहमद खान (Sir Syed Ahmed Khan) को अंग्रेजों का चाटुकार बताया और साथ में यह भी कहा कि सर सैयद ने एएमयू की जमीन 99 साल की लीज पर ली थी, जो असल में राजा महेंद्र प्रताप सिंह की थी. अब जब उत्तर प्रदेश में बीजेपी की सरकार है, तो राजा महेंद्र प्रताप सिंह के परिवार को ही इस जमीन का हक मिलना चाहिए. साध्वी ने इल्जाम लगाया कि AMU ने नगर निगम और वक्फ बोर्ड की कई जमीनों पर अवैध कब्जा कर रखा है, जिसे खाली कराया जाना चाहिए और न्याय होना चाहिए.
कौन थे सर सैयद अहमद खान (Who was Sir Syed Ahmed Khan)
सर सैयद अहमद खान उन्नीसवीं सदी के एक मशहूर समाज सुधारक, अकदमीशियन और लेखक थे. उनका जन्म 1817 में दिल्ली में हुआ था. उन्होंने अंग्रेजी और मॉडर्न एजुकेशन (Modern Education) को मुसलमानों के लिए जरूरी बताया और इसी सोच के साथ 1875 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की स्थापना की. सर सैयद ने मुसलमानों और अंग्रेजों के बीच बेहतर रिश्ते बनाने की भी कोशिश की. वे पश्चिमी विज्ञान और मॉडर्न सोच को मुस्लिम समाज में लाना चाहते थे. सर सैयद अहमद खान ने कई किताबें लिखीं और उन्हें भारतीय मुस्लिम समाज में शिक्षा आंदोलन का जनक माना जाता है.
AMU की स्थानपना करना का क्या था मकसद
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) की स्थापना इसलिए की गई थी ताकि मुसलमानों को भी उस समय की आधुनिक और अंग्रेजी पढ़ाई मिल सके. जब अंग्रेजों का राज था, तब ज़्यादातर मुसलमान अरबी और उर्दू की पढ़ाई कर रहे थे और नई पढ़ाई से दूर हो रहे थे. इसी वजह से वो नौकरी और तरक्की के मौके भी खो रहे थे.
सर सैयद अहमद खान ने मुसलमानों पर किया बड़ा उपकार
सर सैयद अहमद खान ने ये देखा और सोचा कि अगर मुसलमानों को आगे बढ़ना है तो उन्हें भी साइंस, अंग्रेजी और मॉडर्न एजुकेशन सीखनी चाहिए. इसी सोच के साथ उन्होंने 1875 में 'मोहम्मडन एंग्लो ओरिएंटल कॉलेज' की शुरुआत की, जो बाद में 1920 में अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी (AMU) बन गई. इसका मकसद था कि मुसलमान भी पढ़-लिखकर अच्छे अफसर, डॉक्टर, इंजीनियर और समाज सुधारक बनें और देश-दुनिया में नाम कमाएं.