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Sambhal Harihar Mandir Padyatra Postponed: उत्तर प्रदेश के संभल में कैला देवी मंदिर से जामा मस्जिद तक निकलने वाली 22 किलोमीटर लंबी पदयात्रा को बुधवार की शाम रद्द कर दिया गया है. तीन दिन पहले महंत ऋषिराज गिरी ने कैला देवी मंदिर से जामा मस्जिद तक पदयात्रा का ऐलान किया था, जिसके बाद से इलाके में तनाव का माहौल था. मुसलमान डरे हुए थे. उन्हें दो साल पहले हरियाणा के नूह में हुई पदयात्रा और उसके बाद भड़की हिंसा जैसी किसी अनहोनी का डर सताए जा रहा था. अपनी जान-ओ- माल और इज्ज़त- आबरू की हिफाजत को लेकर वो फिक्रमंद थे.
इलाके के मुसलमानों की चिंता बुधवार को उस वक़्त और बढ़ गयी जब, बीजेपी नेता राजेश सिंघल ने कहा कि जिस तरह श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था, ठीक उसी तरह संभल जामा मस्जिद (हरिहर मंदिर) के विवादित ढांचे की ईंट-ईंट उखाड़ लेंगे. बीजेपी के वरिष्ठ नेता राजेश सिंघल के इस विवादित बयान के बाद इलाके के मुसलमानों में दहशत के साथ आक्रोश भी फ़ैल गया. राजेश सिंघल के बयान का सीधा- सीधा मतलब यही निकलता है कि पदयात्रा की आड़ में संभल जामा मस्जिद पर हमले या इलाके में उपद्रव फैलाने की साजिश हो सकती है. प्रशासन कई दिनों से कानून व्यवस्था का हवाला देकर संत के सामने गिरगिरा रहा था कि वो अपनी यात्रा रोक दें, नहीं तो जिले का माहौल बिगड़ सकता है, लेकिन संत तैयार नहीं थे. आखिरकार संत गिरी हरिहर पदयात्रा रद्द करने को राज़ी हो गए, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है.
पदयात्रा कब और कौन करने वाला था ?
संभल मस्जिद ही हरिहर मंदिर है, कोर्ट में पेश इस दावे और मामले के एक साल पूरे होने पर संभल के कैला देवी के महंत ऋषिराज गिरी ने 19 नवंबर को मस्जिद की परिक्रमा के लिए '' श्री हरिहर स्थल परिक्रमा पदयात्रा'' निकालने का ऐलान किया था. पदयात्रा को लेकर रूट प्लान तैयार कर लिया गया था. 22 किलो मीटर इस यात्रा में ढाई किलोमीटर दूरी की यह पदयात्रा 19 नवंबर को सुबह 10 बजे कैला देवी मंदिर से शुरू होनी थी. पदयात्रा में शामिल सभी लोग सारंगपुर, सकरपुर, खिरनी होते हुए मोतीनगर तक वाहन से जाने वाले थे. उसके बाद मोतीनगर से ढाई किलोमीटर की पैदल पदयात्रा होनी थी, जो जामा मस्जिद ( उनके लिए श्री हरिहर मंदिर) की परिक्रमा के बाद वापस कैला देवी मंदिर पहुंचकर ख़त्म होनी थी. इस यात्रा के पीछे महंत ऋषिराज गिरी का मकसद सनातनियों को जागरूक करना था.
कैसे रुकी पदयात्रा ?
श्री हरिहर सेना और कैला देवी के महंत ऋषिराज गिरी की अपील पर हरिहर पदयात्रा के लिए बुधवार को सुबह 9 बजे से ही बड़ी तादाद में साधू संत, हरिहर सेना के युवा और हिंदू संगठनों के लोग कैला देवी धाम पहुंच गए थे. इस दौरान पदयात्रा को रोकने को लेकर कैला देवी धाम इलाके में बड़ी तादाद में पुलिस /RAF/PAC के जवान तैनात रहे. पुलिस ने जगह-जगह बेरीकेडिंग की थी. कैला देवी धाम के मुख्य गेट पर बेरीकेडिंग लगाए जाने पर पुलिस की महंत ऋषिराज गिरी और दीगर साधु-संतों से झड़प भी हो गई. प्रशासन कई दिनों से कानून व्यवस्था का हवाला देकर संत के सामने गिरगिरा रहा था कि वो अपनी यात्रा रोक दें, नहीं तो जिले का माहौल बिगड़ सकता है, लेकिन संत तैयार नहीं थे. लेकिन आखिरकार संत महाराज हरिहर पदयात्रा रद्द करने को राज़ी हो गए, जिससे प्रशासन ने राहत की सांस ली है.
कैला देवी मंदिर के संत जामा मस्जिद विवाद में क्यों कूदे ?
मंहत ऋषिराज गिरी के इस ऐलान के बाद पुलिस प्रशासन अलर्ट हो गया था. विवादित जामा मस्जिद / श्री हरिहर मंदिर स्थल की सुरक्षा मजीद बढ़ा दी गई थी. संभल मस्जिद विवाद को देखते हुए पूरे संभल जिले में BNS की धारा 163 लागू है, जिसके तहत जिले में किसी तरह का जुलूस और पदयात्रा वगैरह निकालने पर पाबंदी है. इसके बावजूद महंत धार्मिक पदयात्रा निकालने पर अड़े हुए थे. महंत का मानना है कि संभल में धारा 163 लागू होने के बावजूद पदयात्रा निकालना उनका धार्मिक अधिकार. महंत ये अधिकार इसलिए जमा रहे हैं कि संभल जामा मस्जिद ( कानून की नज़र में विवादित ढांचे) के श्री हरिहर मंदिर होने के दावे की कोर्ट मे याचिका दाखिल करने वालो में वो भी शामिल है. इसके अलावा वो प्रदेश के मुख्यमंत्री सीएम योगी के बेहद करीबी माने जाते हैं.
संभल हिंसा क्यों और कब हुई थी ?
संभल की जामा मस्जिद जिसे हिन्दू श्री हरिहर मंदिर मानते हैं, यहाँ पिछले साल सर्वे के दौरान हिंसा में 5 लोग मारे गए. यह हिंसा 24 नवंबर 2024 को उस वक़्त भड़क गई थी जब कोर्ट के आदेश पर शाही जामा मस्जिद के सर्वेक्षण के लिए पुरातत्व विभाग के लोग पहुंचे थे. इस हिंसा में मरने वाले सभी लोग स्थानीय मुस्लिम समाज के लोग थे. पीड़ितों का इल्ज़ाम है कि पुलिस की गोली से उनकी मौत हुई. पुलिस ने भीड़ को नियंत्रित करने की आड़ में जानबूझकर उन्हें निशाना बनाया. वहीँ, पुलिस ने इस मामले में भीड़ में शामिल लोगों को ही आरोपी बना दिया कि गोली भीड़ में शामिल लोगों ने चलाई है. इस मामले में लगभग 80 लोगों के खिलाफ मुकदमा दर्ज किया गया, और उन्हें गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया. इनमें कुछ लोग ज़मानत पर रिहा भी हो गए हैं, जबकि दर्ज़नों लोग आज भी गिरफ्तारी के डर से फरार हैं. पुलिस ने सार्वजनिक तौर पर इन फरार लोगों की दीवारों पर तस्वीर लगा दी है, कई के सर पर इनाम रख दिया है.
मस्जिद कमिटी ने पदयात्रा पर जताया था ऐतराज़
इस प्रस्तावित पदयात्रा को लेकर संभल जामा मस्जिद के सदर जफर अली ने ऐतराज़ जताया था. उन्होंने कहा था कि हरिहर परिक्रमा पदयात्रा की नई परंपरा से शहर का माहौल खराब हो सकता है. कोई भी बड़ी घटना हो सकती है. सदर जफर अली ने जिला प्रशासन से श्री हरिहर परिक्रमा पदयात्रा की परमीशन न देने की अपील की थी.
क्या कहते हैं मुसलमान ?
बुधवार को जब बीजेपी नेता राजेश सिंहल ने कहा कि जिस तरह श्री राम मंदिर के निर्माण के लिए बाबरी मस्जिद को ध्वस्त कर दिया गया था, उसी तरह श्री हरिहर मंदिर के लिए विवादित ढांचे की ईंट ईंट उखाड़ लेंगे, तब मुसलमानों ने इस बयान की तीखी आलोचन की. मुस्लिमों का मानना है कि इस वक़्त बीजेपी की सत्ता की लहर है, इसलिए बीजेपी नेता इस तरह के विवादित बयान दे रहे है. ये मामला अभी कोर्ट में है. इस तरह के बयान उन्हें नहीं देने चाहिए. बीजेपी के नेता सिर्फ हिन्दू वोट हासिल करने और सुर्खियों में रहने के लिए ऐसे बयान दे रहे है. इस तरह के विवादित और माहौल खराब करने वाले बयान देने वाले नेताओं के खिलाफ कानूनी कार्रवाई होनी चाहिए. हालांकि, किसी भी मुसलमान ने भाजपा नेता के इस उकसाऊ बयान पर अभी तक अपनी तरफ से कोई भड़काऊ बयान नहीं दिया है.
गौरतलब है कि संभल जामा मस्जिद के मंदिर होने का केस इस वक़्त कोर्ट में पेंडिंग है. उसपर सुनवाई चल रही है. अभी तीन दिन पहले ही इलाहबाद हाईकोर्ट ने लोअर कोर्ट से कहा है कि इस मुद्दे का साल भर के अन्दर निपटारा करे. लेकिन इसी बीच पदयात्रा की घोषणा क्यों और कैसे हो गयी? यात्रा भले ही टल गई हो, लेकिन संभल में आने वाले समय में किसी बड़े विवाद होने को लेकर इलाके के लोग आशंकित हैं. 2027 में उत्तर प्रदेश के विधानसभा चुनाव और 2029 के लोकसभा चुनाव में इस मुद्दे को हवा देकर वोटों का ध्रुवीकरण किया जा सकता है, इस आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता है..
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