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नई दिल्ली: इतवार के रोज़ बीजेपी के कौमी नायब सदर श्याम जाजू और दिल्ली बीजेपी के सद्र आदेश गुप्ता की मौजूदगी में शहज़ाद नाम के एक शख्स ने भाजपा का दमान थामा था. शहज़ाद की ज्वाइनिंग इसलिए चर्चाओं में है क्योंकि शहज़ाद के बारे में कहा गया है कि वो शाहीनबाग का रहने वाला है और शाहीनबाग में हुए सीएए और एनआरसी मुज़ाहिरों में शामिल रहा है. इतवार के रोज़ से ही शहज़ाद की तस्वीरें वायरल हैं और लोग शाहीनबाग और शहज़ाद के मामले को लेकर अपनी राय रख रहे हैं.
कौन हैं शहज़ाद अली ?
शहज़ाद मुज़फ्फरनगर के सिखेड़ा गांव का रहने वाला है. 15 साल पहले काम के सिलसिले में दिल्ली आया था. शहज़ाद पिछले कुछ सालों से दिल्ली में हुए समाजी तंजीमों के मुज़ाहिरों में शामिल रहा हैं लेकिन किसी तंज़ीम से मुस्तकिल तौर पर जुड़ा नहीं रहा. जेएनयू के तालिबे इल्म नजीब अहमद गुमशुदगी मामला हो, या मॉब लिंचिंग से जुड़े वाक्यात, पिछले कुछ सालों में शहज़ाद की मौजूदगी इन सब में नज़र आई. शाहीनबाग मुज़ाहिरे के दौरान भी शहज़ाद को देखा जाता था लेकिन इस मुज़ायरे में उनकी मौजूदगी दूसरे आम मुज़ाहिरीन के तौर पर होती थी किसी जिम्मेदार के तौर पर नहीं.
शहज़ाद पर क्या कहती हैं शाहीनबाग की ख्वातीन?
शाहीनबाग में सैंकड़ों औरतें रोज़ आती थीं लेकिन सबकी निगाहों का मरकज़ वहां की दादियां थी. शाहीनबाग के मुज़ायरें में शामिल रही औरतें इस शहज़ाद और दूसरे लोगों के भाजपा में शामिल होने पर कहती हैं कि इस मुज़ाहिरे में सिर्फ दिल्ली नहीं बल्कि पूरे मुल्क से लोग आते थे ऐसे में शाहीनबाग मुज़ाहिरे का कोई एक चेहरा नहीं था. शहज़ाद को वो नहीं जानती. क्योंकि मुज़ाहिरे के दौरान शहज़ाद ने कोई जिम्मेदारी तो नहीं निभाई, वहां रोज़ाना हज़ारों लोग आते थे, हो सकता हैं शहज़ाद भी वहां आता रहा हो.
बीजेपी में क्यों गए शहज़ाद?
शहज़ाद कहते हैं कि हमनें 70 सालों तक कांग्रेस को वोट दिया, हमें क्या मिला? आज जो हालात हैं उसके लिए कौन जिम्मेदार है. बीजेपी को हम दुश्मन क्यों समझते हैं? किसी भी मसले का हल बातचीत है इसी उम्मीद के साथ मैं बीजेपी में आया हूं और यहां रहकर काम करूंगा.
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