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Sambhal News: संभल की शाही जामा मस्जिद में सर्वे के दौरान हिंसा भड़क उठी थी. मस्जिद के सदर जफर अली भी इस हिंसा में आरोपी हैं. फिलहाल, मस्जिद के प्रमुख को हाईकोर्ट से ज़मानत मिल गई है. अब खबर आ रही है कि जफर अली की मुश्किलें एक बार फिर बढ़ने वाली हैं.
दरअसल, हाल में ही जफर अली उत्तर प्रदेश आगामी विधानसभा 2027 के चुनाव लड़ने का ऐलान किया है. इस ऐलान के बाद पुराने हिंसा मामले को लेकर उन पर सवाल उठने लगे हैं. सरकार की तरफ से संभल हिंसा मामले की पैरवी कर रहे जिला शासकीय वकील राहुल दीक्षित ने बड़ा बयान जिया है. उन्होंने कहा कि जफर अली का चुनाव लड़ने का ऐलान इस बात का संकेत है कि उन्होंने राजनीतिक लाभ लेने के इरादे से ही उस समय हिंसा भड़काई थी.
सदर पर संगीन इल्जाम
राहुल दीक्षित के मुताबिक, पहले जफर अली खुद को फंसाया गया बताते थे, लेकिन अब राजनीति में उतरने की उनकी महत्वाकांक्षा यह साबित करती है कि हिंसा के पीछे उनका उद्देश्य राजनीतिक फायदा उठाना था. राहुल दीक्षित ने कहा, “अगर जफर अली विधानसभा चुनाव लड़ना चाहते हैं, तो पहले उन्हें अदालत में खुद को निर्दोष साबित करना चाहिए. संभल हिंसा केस में उनके खिलाफ जो सबूत मिले हैं, वे बेहद पुख्ता हैं, जिनके आधार पर उन्हें बड़ी सजा हो सकती है.”
क्या है पूरा मामला
गौरतलब है कि संभल हिंसा के दौरान शहर में भारी बवाल और संपत्तियों को नुकसान पहुंचा था, जिसके बाद जफर अली समेत कई लोगों पर साजिश और हिंसा भड़काने के संगीन इल्जाम लगे थे. अब चुनावी मैदान में उतरने की घोषणा ने न सिर्फ राजनीतिक हलचल बढ़ा दी है, बल्कि उनके पुराने केस को भी दोबारा सुर्खियों में ला दिया है.