शीबा तौक़ीर ने बोरिंग सी ऑनलाइन क्लासेस को दिलचस्प बना दिया है. शीबा के पढ़ाने के अनोखे तरीके से बच्चे न सिर्फ पूरे दिल से क्लास अटेंड करते हैं बल्कि सबक को ज्यादा आसानी से सीख भी लेते हैं.
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लखनऊ: टीचर्स डे के मौके पर हम आपको मिलवाते हैं एक ऐसी टीचर से जिन्होंने बच्चों के समझाने के लिए घर को थिएटर में बदल दिया. कोरोना की वजह से स्कूल तो बंद हैं लेकिन ऑनलाइन पढ़ाई जारी है. लॉकडाउन में बच्चे अपनी पढ़ाई के लिए लैपटॉप, मोबाइल, कंप्यूटर और टैब पर मुनहसिर हैं. ऑनलाइन पढ़ाई के ज़रिए छोटे-छोटे बच्चों को पढ़ाना बेहद मुश्किल काम है लेकिन इस मुश्किल काम को आसान कर दिखाया है लखनऊ की शीबा तौकीर ने.
दरअसल लखनऊ की टीचर शीबा तौक़ीर ने बोरिंग सी ऑनलाइन क्लासेस को दिलचस्प बना दिया है. शीबा के पढ़ाने के अनोखे तरीके से बच्चे न सिर्फ पूरे दिल से क्लास अटेंड करते हैं बल्कि सबक को ज्यादा आसानी से सीख भी लेते हैं. शीबा हर रोज़ नए किरदार में बच्चों के सामने आती हैं और इस तरह बोरिंग ऑनलाइन पढ़ाई को दिलचस्प बन जाती है. बच्चे सीखते भी हैं और चहकते भी हैं.
लखनऊ के विकासनगर की रहने वाली शीबा लखनऊ के एक प्राइवेट स्कूल में ढाई साल से पढ़ा रही हैं. वो कहती हैं, 'छोटे बच्चों को कंप्यूटर स्क्रीन के सामने रोककर रखना मुश्किल काम है इसके लिए स्पेशल तकनीक की जरूरत होती है.
इतना ही नहीं शीबा ने बच्चों को पढ़ाने के लिए अपने घर को छोटे-मोटे थियेटर में तब्दील कर दिया है. शीबा को अपना घर कभी किले में बदलना पड़ता है, कभी अस्पताल में और कभी-कभी तो जंगल में भी. अभी प्यासे कौए' की कहानी कहने के लिए उन्होंने अपने बरामदे को जंगल का लुक दिया, एक मटका लाईं, पेड़ लगाए, पत्थर लाईं और कागज से सूरज और कौआ बनाया.
शीबा बताती हैं कि बच्चे वीडियो या तस्वीर देखकर, कहानी सुनकर जल्दी सीखते हैं. स्कूल में पढ़ाने से ऑनलाइन पढ़ाना बेहद मुश्किल है लेकिन जब सुबह-सुबह स्क्रीन के सामने बच्चों के हंसते हुए चेहरे दिखाई देते हैं तो इन्हें पढ़ाने के नए-नए तरीके तलाश करने ही पड़ते हैं.
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