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नई दिल्ली: हिंदुस्तान हर साल 15 अगस्त (Independence Day) और 26 जनवरी (Republic Day) मनाता है. इस दिन कौमी परचम (तिरंगा) इन दो खास दिनों में तिरंगे की खास अहमियात है. तिरंगा हिंदुस्तान का फख्र है और हिंदुस्तान की खुदमुख्तारी का मज़हर है. इसे इज्ज़त के साथ मुल्क के हर काबिले ऐहतराम मकामात पर पर फहराया जाता है लेकिन इस कौमी परचम से जुड़ी कुछ ऐसी बातें जो हर मुहिब्बे-वतन को जानना चाहिए.
- तिरंगा (National Flag) हमेशा सूरज निकलने से पहले और सूरज छिपने के दरमियान ही फहराया जा सकता है.
- तिरंगे को कभी झुकाया नहीं जाता, न ही ज़मीन पर रखा जाता है. किसी खास हुक्म के बाद ही हुकूमती इमारतों पर झंडे को आधा झुका कर फहराया जा सकता है.
- झंडे को कभी पानी में नहीं डुबोया जा सकता और इसको किसी भी तरह से नुकसान नहीं पहुचाया जाता है.
- झंडे के किसी हिस्से को जलाने, नुकसान पहुंचाने के अलावा ज़बानी या लफ्ज़ी तौर पर इसकी बेइज्ज़ती करने पर तीन साल तक की जेल/जुर्माना, या दोनों हो सकते हैं.
- तिरंगे का की शक्ल आयताकार होनी लाज़मी है. इसकी लंबाई और चौड़ाई का अनुपात 3:2 का होना चाहिए.
- तिरंगा हमेशा कॉटन, सिल्क या फिर खादी का ही होना चाहिए.
- तिरंगे को हमेशा अपनी नज़दीक किसी भी सबसे ऊंची जगह पर फहराना चाहिए.
- तिरंगे का इस्तेमाल किसी प्रोग्राम में मेज़ को ढकने या मंच को सजाने में नहीं किया जाता है
- कभी भी फटा या मैला-कुचैला तिरंगा नहीं फहराया जाता है. झंडा फट जाए, मैला हो जाए तो उसे अकेले में जला देना चाहिए या किसी किसी दूसरे तरीके से नष्ट करना चाहिए, ताकि उसकी वकार बना रहे.
- झंडे को पवित्र नदी में जल समाधि भी दी जा सकती है.
- तिरंगे के कपड़े बनाकर पहनना गलत है और अंडरगार्मेंट्स, रुमाल या कुशन वगैरा बनाकर इस्तेमाल करना इसका की बेहुरमती होगी.
- हिंदुस्तान के कौमी परचम (तिरंगे) को मुल्क के आइनी इजलास ने 22 जुलाई 1947 को मुंतखब था.
- तिरंगे में 3 रंग हैं, केसरिया, सफेद और हरा.
- केसरिया रंग हिम्मत और कुर्बानी का मज़हर है.
- सफेद रंग सच्चाई, अमन और पाकीज़गी का मज़हर है, हरा रंग खुशहाली का मज़हर है.
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