Jantar-Mantar Protest: जंतर-मंतर पर चल रहे प्रदर्शन को सपा के नेता फखरुल हसन चांद ने स्पोर्ट करते हुए अपनी प्रतिक्रिया जाहिर की हैं. उन्होंने कहा हैं कि सपा पार्टी हमेशा से ही वक्फ बोर्ड बिल में हुए संशोधन के खिलाफ थी और आगे भी इसके खिलाफ रहेगीं.
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Jantar-Mantar Protest: राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड द्वारा वक्फ संशोधन बिल के खिलाफ प्रदर्शन जारी है. जिसके लिए तमाम लोग और पॉलिटिकल पार्टी जंतर-मंतर पर इक्ठ्ठा हो रही हैं. प्रदर्शनकारियों का कहना है कि सरकार की दखलअंदाजी हम वक्फ बोर्ड पर नहीं चाहतें हैं.
इसी बीच अब लखनऊ से समाजवादी पार्टी के नेता फखरुल हसन चांद ने भी इस प्रदर्शन का स्पोर्ट किया है. नेता ने कहा कि सपा पार्टी पहले भी इस संशोधन का विरोध करती थी और आगे भी करती रहेगी.
वक्फ बोर्ड बिल में हुए संशोधन के बारे में मीडिया से बात करते हुए सपा के नेता फखरुल हसन चांद ने कहा, "वक्फ संशोधन को लेकर जो सुझाव विपक्ष की तरफ से दिए गए, उन्हें संशोधनों में शामिल नहीं किया गया. चेयरमैन ने मनमानी की, क्योंकि वह भाजपा के सांसद थे और अपनी पार्टी के एजेंडे पर काम कर रहें थे. समाजवादी पार्टी ने पहले भी वक्फ संशोधन विधेयक का विरोध किया है और आगें भी इसका विरोध करती रहेगी. हमारा देश लोकतांत्रिक है और बाबा साहेब के संविधान ने हमें प्रदर्शन का हक दिया है. इसी के तहत संगठन वक्फ संशोधन विधेयक 2024 का विरोध कर रहे हैं, जो बिल्कुल सही है."
औरंगजेब की कब्र हटाने को लेकर भी की बात-चीत
इसके अलावा नेता फखरुल हसन चांद ने मीडिया से औरंगजेब की कब्र हटाने के लिए शुरू हुए अभियान पर बात की है. उन्होंने कहा, "बीजेपी और उससे जुड़े तमाम पार्टी और संगठनों का एक ही एजेंडा है, जिसमें नफरत और बंटवारा शामिल है. कोई संगठन गरीबी और बेरोजगारी हटाने के लिए आंदोलन क्यों नहीं करता है? महाराष्ट्र की बिगड़ी हुई कानून-व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए आंदोलन क्यों नहीं चलाया जा रहा है? भाजपा का सिर्फ एक ही काम है नफरत फैलाना और वे इसी एजेंडे पर काम कर रही हैं."
वक्फ बिल के खिलाफ हैं, वो सुप्रीम कोर्ट जाए
वक्फ बोर्ड बिल में हुए संशोधन को लेकर विपक्ष पार्टी के रवैये पर वक्फ जेपीसी के अध्यक्ष एवं बीजेपी सांसद जगदंबिका पाल ने भी अपनी बात रखी है. उन्होंने मीडिय के सवालों का जवाब देते हुए कहा, "जो वक्फ बिल के खिलाफ हैं, वो सुप्रीम कोर्ट जा सकते हैं. लेकिन वे एक तरफ सुप्रीम कोर्ट जाने की बात कर रहे हैं, तो दूसरी तरफ धमकी दे रहे हैं. लोकतंत्र धमकी से नहीं बल्कि प्रजातंत्र और जनतंत्र से चलेगा. देश के अंदर जनता के चुने गए जनप्रतिनिधियों यानी की जनता द्वारा चुने गए नेता द्वारा कानून बनाया जाएगा, या फिर धमकी से बनेगा."