हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा..वाक़िए हो गए कहानी से, गुलज़ार देहलवी के इंतेकाल पर खास

मेरा मक़सद किसी शायर पर न तो तनक़ीद करना है...न ही कोई नया तनाज़ा पैदा करना है...दौरे हाज़िर में जो शायर हैं वो अच्छी शायरी कर रहे हैं...उर्दू अदब उन्हे याद रखेगा...लेकिन.......

हाए क्या दौर-ए-ज़िंदगी गुज़रा..वाक़िए हो गए कहानी से, गुलज़ार देहलवी के इंतेकाल पर खास
Image Credit: फाइल फोटो

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