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कर्नल सोफिया विवाद: SIT ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पहली स्टेटस रिपोर्ट, कल होगी सुनवाई

Colonel Sophia Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मंत्री और बीजेपी नेता विजय शाह के खिलाफ बनी विशेष जांच टीम (एसआईटी) की रिपोर्ट को अपनी रजिस्ट्री में दर्ज करने का आदेश दिया है.

कर्नल सोफिया विवाद: SIT ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल की पहली स्टेटस रिपोर्ट, कल होगी सुनवाई

Colonel Sophia Controversy: सुप्रीम कोर्ट ने आज यानी 27 मई को एक अहम फैसला लिया. कोर्ट ने मध्य प्रदेश के मंत्री और बीजेपी नेता विजय शाह के उस विवादित बयान की जांच कर रही एसआईटी (विशेष जांच टीम) की रिपोर्ट को अपनी रजिस्ट्री में दर्ज करने का आदेश दिया है. 

दरअसल, राज्य सरकार के वकील ने इस मामले का ज़िक्र सुप्रीम कोर्ट में मौखिक रूप से किया. इसके बाद जस्टिस सूर्यकांत और दीपांकर दत्ता की पीठ ने सुप्रीम कोर्ट की रजिस्ट्री को आदेश दिया कि एसआईटी (विशेष जांच टीम) की जांच रिपोर्ट को आधिकारिक रिकॉर्ड में शामिल किया जाए. ये घटनाक्रम उस वक्त हुआ जब सुप्रीम कोर्ट की यही पीठ बुधवार को एक अहम सुनवाई करने वाली है. इस सुनवाई में मध्य प्रदेश के मंत्री विजय शाह की उस याचिका पर चर्चा होगी, जिसमें उन्होंने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के उस आदेश को चुनौती दी है, जिसमें उनके खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का निर्देश दिया गया था. ये एफआईआर उनकी विवादित टिप्पणी को लेकर दर्ज करने के लिए कहा गया था.

मंत्री ने दिया था विवादित बयान
ऑपरेशन सिंदूर के बारे में बात करते हुए मंत्री विजय शाह ने कथित तौर पर कहा था कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कश्मीर के पहलगाम में 22 अप्रैल को हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए पाकिस्तान में रहने वालों की तरह ही "उसी समुदाय की एक बहन" को भेजा था, जिससे पूरे देश में आक्रोश फैल गया था. पिछले हफ़्ते, सुप्रीम कोर्ट ने राज्य के पुलिस महानिदेशक को मध्य प्रदेश कैडर के तीन वरिष्ठ आईपीएस अधिकारियों की एक एसआईटी बनाने का आदेश दिया था, जिसमें एक महिला आईपीएस अधिकारी भी शामिल थी, जो शाह के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 152, 196 (1) (बी) और 197 के तहत दर्ज एफआईआर की जांच करेगी.

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जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने क्या कहा?
जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने 19 मई को पारित अपने आदेश में कहा, "एसआईटी का नेतृत्व पुलिस महानिरीक्षक के पद से नीचे का अधिकारी नहीं करेगा और शेष दो सदस्य भी पुलिस अधीक्षक या उससे ऊपर के पद पर होंगे. संबंधित एफआईआर की जांच तत्काल एसआईटी को सौंपी जाएगी." इसके अलावा, इसने आदेश दिया था कि शाह के खिलाफ गिरफ्तारी सहित कोई भी दंडात्मक कार्रवाई नहीं की जाएगी, लेकिन मध्य प्रदेश के मंत्री को जांच में शामिल होने और पूरा सहयोग करने के लिए कहा. 

SIT में कितने लोग हैं शामिल
सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद, मध्य प्रदेश के डीजीपी कैलाश मकवाना ने 19 मई को एसआईटी का गठन किया, जिसमें आईजी, सागर रेंज, प्रमोद वर्मा (2001 बैच आईपीएस), डीआईजी, एसएएफ, कल्याण चक्रवर्ती (2010 बैच) और डिंडोरी एसपी वाहिनी सिंह (2014 बैच) शामिल थे. शनिवार को, तीन सदस्यीय एसआईटी ने इंदौर जिले के महू क्षेत्र के पास रायकुंडा गांव का दौरा किया, जहां शाह ने 12 मई को एक सार्वजनिक कार्यक्रम में हिस्सा लिया था और विवादास्पद टिप्पणी की थी. टीम ने गांव के सरपंच और सचिव से मुलाकात की. साथ दोनों ही कार्यक्रम के आयोजक हैं से भी मुलाकात की. जिन्हें पहले मानपुर पुलिस ने बुलाया था, जहां मामले में एफआईआर दर्ज की गई थी.

एसआईटी कर रही है जांच
एसआईटी ने कार्यक्रम के वीडियो फुटेज और उपस्थित लोगों की सूची सहित प्रासंगिक दस्तावेज एकत्र किए हैं. मध्य प्रदेश उच्च न्यायालय ने 14 मई को डीजीपी को चार घंटे के भीतर शाह के खिलाफ आपराधिक मामला दर्ज करने का आदेश दिया था और अनुपालन में किसी भी देरी के मामले में शीर्ष पुलिस अधिकारी पर अवमानना ​​की कार्रवाई की चेतावनी दी थी. जस्टिस अतुल श्रीधरन और अनुराधा शुक्ला की पीठ ने कहा कि प्रथम दृष्टया, विभिन्न जातियों, धर्मों और भाषाओं के बीच दुश्मनी को बढ़ावा देने का अपराध बनता है. जस्टिस श्रीधरन की अगुवाई वाली पीठ ने कहा कि कर्नल कुरैशी को "आतंकवादियों की बहन" कहना मुस्लिम समुदाय की भावनाओं और आस्था को ठेस पहुंचाने का अपराध है.

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