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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में कृषि कानूनों पर दूसरे दिन की सुनवाई के दौरान केंद्र सरकार के खेती कानूनों पर रोक लगा दी गई है. जराए से मिली जानकारी के मुताबिक एक कमेटी का गठन भी किया गया है. इस कमेटी 4 लोग शामिल होंगे. जो सुप्रीम कोर्ट को रिपोर्ट करेंगे.
खबरों के मुताबिक बनाई गई कमेटी में भूपिंदर सिंह मान; प्रेसिडेंट बीकेयू, डॉ प्रमोद कुमार जोशी रिसर्चर, अशोक गुलाटी, एग्रीकल्चर इकोनॉमिक्स, अनिल धनवट - शेतकेरी संगठन महाराष्ट्र शामिल हैं.
हालांकि किसानों की तरफ से वकील एमएल शर्मा ने कहा कि किसान कमेटी के पक्ष में नहीं हैं और हम कानूनों की वापसी ही चाहते हैं. उन्होंने कहा कि किसानों की जमीन बेच दी जाएंगी.
इसके बाद चीफ जस्टिस ने वकील से पूछा कि ये कौन कह रहा है कि जमीन बिक जाएंगी? शर्मा ने कहा कि अगर हम कंपनी के साथ कॉन्ट्रैक्ट करेंगे और फसल की क्वॉलिटी अच्छी नहीं हुई तो कंपनी उनसे भरपाई मांगेगी.
इस पर CJI ने कहा कि हम अंतरिम आदेश में कहेंगे कि ज़मीन को लेकर कोई कांट्रेक्ट नहीं होगा.
चीफ जस्टिस एसए बोबडे ने कहा, 'हम चाहते हैं कि किसान कमेटी के पास जाएं, हम इस मुद्दे का हल चाहते हैं और अनिश्चितकालीन प्रदर्शन से हल नहीं निकलेगा.' उन्होंने कहा, 'कोई भी हमें कमेटी बनाने से नहीं रोक सकता है. जो कमेटी बनेगी, वो हमें रिपोर्ट देगी.'
CJI ने कहा कमेटी हम अपने लिए बना रहे है और कमेटी हमें रिपोर्ट देगी. कमेटी के सामने कोई भी जा सकता है. एमएल शर्मा ने कहा कि किसान कल मरने की बजाय आज मरने को तैयार हैं. CJI ने कहा कि हम इसे जिदंगी के मामले की तरह नहीं देख रहे. हमारे सामने कानून की वैधता का सवाल है. कानूनों के अमल को स्थगित रखना हमारे हाथ में है. लोग बाकी मसले कमेटी के सामने उठा सकते हैं.
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