नोएडा अथॉरिटी के आंख, नाक, कान और चेहरे तक से टपकता है भ्रष्टाचार: सुप्रीम कोर्ट

इलाहाबाद हाई कोर्ट के एक फैसले को सुपरटेक, नोएडा अथॉरिटी और कुछ फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है.

नोएडा अथॉरिटी के आंख, नाक, कान और चेहरे तक से टपकता है भ्रष्टाचार: सुप्रीम कोर्ट
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नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने बुधवार को एक अर्जी पर सुनवाई के दौरान नोएडा अथॉरिटी पर सख्त टिप्पणियां कीं. कोर्ट ने कहा कि नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है इसकी आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है. सुप्रीम कोर्ट ने एमराल्ड कोर्ट के ट्विन टावर एपेक्स और सियान से जुड़ी एक याचिका पर सुनवाई के दौरान नोएडा अथारिटी की भूमिका पर भी सवाल उठाए.

बता दें कि साल 2014 में इलाहाबाद हाईकोर्ट (Allahabad High Court) ने एमराल्ड कोर्ट ओनर रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन की याचिका पर सुनवाई करते हुए एपेक्स और सियान टावरों को गलत ठहरा दिया था. साथ ही इनको गिराने के भी हुक्म दिया था. अदालत ने फ्लैट बुक कराने वालों को पैसा वापस करने का हुक्म दिया था. साथ ही प्लान सेंक्शन (मंजूर) करने के जिम्मेदार नोएडा अथारिटी के अधिकारियों को प्रासीक्यूट करने (मुकदमा चलाने) का आदेश दिया था.

इलाहाबाद हाई कोर्ट के इस फैसले को सुपरटेक, नोएडा अथॉरिटी और कुछ फ्लैट खरीदारों ने सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी है. सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम आदेश में एपेक्स और सियान टावर गिराने पर रोक लगा दी थी. साथ ही सुपरटेक से कहा था कि जो लोग पैसा वापस चाहते हैं उन्हें पैसा लौटाया जाए. अदालत ने एनबीसीसी से दोनों टावरों पर रिपोर्ट मांगी थी. एनबीसीसी ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि दोनों टावरों के बीच जरूरी दूरी नहीं है.

जस्टिस चंद्रचूड़ और एमआर शाह की बेंच ने बुधवार को सुनवाई के दौरान नोएडा अथारिटी के किरदार पर सवाल उठाते हुए कहा कि नोएडा का काम हैरान करने वाला है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा जब आपसे रेजीडेंट वेलफेयर एसोसिएशन ने बिल्डिंग का सैंक्शन प्लान मांगा तो आपने सुपरटेक से पूछा और उसने मना कर दिया तो आपने बिल्डिंग प्लान नहीं दिया. आखिर में हाईकोर्ट के हुक्म पर आपने हाईकोर्ट में प्लान दिया. आप सुपरटेक की मदद ही नहीं कर रहे, आपकी उसके साथ मिलीभगत है. नोएडा एक भ्रष्ट निकाय है, इसकी आंख, नाक, कान और यहां तक कि चेहरे तक से भ्रष्टाचार टपकता है. जस्टिस चंद्रचूड़ ने कहा कि हम लोग भी वकील रहें हैं. 

इतना ही नहीं जस्टिस एमआर शाह ने नोएडा अथॉरिटी के वकील रविन्द्र कुमार के बहस के तरीके पर टिप्पणी करते हुए कहा कि जिस तरह आप फ्लैट मालिकों के खिलाफ केस लड़ रहे हैं वह तरीका उचित नहीं है.

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