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नई दिल्ली: प्राइवेट लेब में कोरोना टेस्ट के मुफ्त कराने के खुद के फैसले में तरमीर करते हुए सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) ने कहा है कि जो अहल हों उनसे इस टेस्ट के 4500 रुपये लिए जा सकते हैं लेकिन वो लोग जो आयुष्मान भारत योजना के दायरे में आते हैं या जो गैर रस्मी शोबे में काम करते हैं और कम आमदनी वाले हैं और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर के दायरे में आते हैं, उनसे कोई भी फीस नहीं ली जानी चाहिए. बता दें कि 8 अप्रैल को सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि प्राइवेट लेब में कोरोना टेस्ट की फीस नहीं ली जानी चाहिए बल्कि मरीज़ से पैसे लिए जाने के बजाए हुकूमत इस जांच फीस भरे.
बता दें कि हुकूमत और निजी डाक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट से सभी के लिए प्राइवेट लैब में फ्री टेस्ट के फैसले में तरमीम करने का मुतालिबा किया था. कोरोना टेस्ट फ्री में करने के सुप्रीम कोर्ट के हुक्म को मानने से मरकज़ी हुकूमत ने इनकार कर दिया था. हुकूमत ने सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दाखिल कर कोर्ट को यह जानकारी दी.
इस पर सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि हुक्म बाद में देंगे, जो कोर्ट की वेबसाइट पर आएगा. समाअत के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने निजी लैब में मुफ्त कोरोना जांच के हुक्म में तब्दीली करने पर रज़ामंदी का इज़हार किया है और सुप्रीम कोर्ट तहरीरी हुक्म बाद में देगा.
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