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Supreme Court on Mysuru Dasara Inauguration: कर्नाटक सरकार ने बुकर अवार्ड विनर लेखिका बानू को इस साल के मैसूर दशहरा समारोह का उद्घाटन करने के लिए न्योता दिया है. सरकार के इस फैसले का बीजेपी और हिंदू संगठन विरोध कर रहे हैं. विरोध इतना बढ़ गया है कि अब यह मामला सुप्रीम कोर्ट तक पहुंच गया. आज (19 सितंबर) दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए अदालत ने याचिकाकर्ता की दलील को खारिज कर दिया.
कोर्ट ने सुनवाई के दौरान कहा कि भारत का संविधान धर्मनिरपेक्ष मूल्यों पर आधारित है और राज्य सरकार द्वारा आयोजित कार्यक्रम किसी निजी संस्था का आयोजन नहीं होता. सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने तर्क दिया था कि मैसूर दशहरा सिर्फ एक सांस्कृतिक उत्सव नहीं है, बल्कि यह हिंदू धार्मिक परंपराओं और आस्थाओं से जुड़ा पवित्र अनुष्ठान है. इसकी शुरुआत वैदिक मंत्रोच्चार और चामुंडेश्वरी देवी की पूजा से होती है. ऐसे में बानू मुश्ताक के रूप में एक मुस्लिम महिला को समारोह का उद्घाटन करने के लिए बुलाना परंपरा और धार्मिक भावनाओं के खिलाफ है.
सुप्रीम कोर्ट ने सभी दलील को किया दरकिनार
हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस तर्क को खारिज करते हुए कहा कि 2017 में भी मशहूर मुस्लिम कवि निसार अहमद ने मैसूर दशहरा का उद्घाटन किया था. अदालत ने कहा कि हमारे संविधान की प्रस्तावना स्पष्ट करती है कि भारत एक धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है. ऐसे में किसी भी धर्म विशेष के आधार पर भेदभाव करना न्यायोचित नहीं है.
हाईकोर्ट के फैसले को चुनौती
गौरतलब है कि बेंगलुरु के एक निवासी एचएस गौरव की ओर से दायर पीआईएल में कहा गया कि दशहरा के उद्घाटन को हिंदू परंपरा का अभिन्न हिस्सा घोषित किया जाना चाहिए और इसे हिंदू गणमान्य व्यक्ति द्वारा ही किया जाना चाहिए. सुप्रीम कोर्ट के समक्ष दायर एसएलपी में कर्नाटक हाईकोर्ट के उस फैसले को चुनौती दी गई थी, जिसमें मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने के राज्य सरकार के फैसले को चुनौती देने वाली जनहित याचिकाओं (पीआईएल) को खारिज कर दिया गया था. मैसूर दशहरा के उद्घाटन के दौरान देवी चामुंडेश्वरी को फूल चढ़ाने की परंपरा है और विपक्षी बीजेपी इस बात पर आपत्ति जता रही है कि बानू मुश्ताक दूसरे धर्म से हैं.
हाईकोर्ट में दी गई दलील
कर्नाटक हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश विभू बाखरू और जस्टिस सीएम जोशी की बेंच ने 15 सितंबर को अपने फैसले में कहा था कि किसी के भी अधिकार का उल्लंघन नहीं हुआ है और कहा कि विजय दशमी का त्योहार पूरे देश में मनाया जाता है और यह बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. हालांकि, विपक्ष ने मैसूर दशहरा के उद्घाटन के लिए बानू मुश्ताक को आमंत्रित करने के राज्य सरकार के फैसले को 'गलत' बताया है और याचिकाकर्ताओं ने यह भी दावा किया कि बुकर प्राइज विजेता ने हिंदू विरोधी बयान दिए थे और कन्नड़ भाषा के खिलाफ टिप्पणी की थी. वहीं, कर्नाटक सरकार का कहना है कि मैसूर दशहरा इस क्षेत्र का त्योहार है, न कि कोई धार्मिक कार्यक्रम.