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Supreme Court on Pregnant Woman: भारत के कई राज्यों में बांग्लादेशी नागरिकों की पहचान करके उन्हें निकाला जा रहा है. इसी सिलसिले में एक प्रेग्नेंट महिला को भी डिपोर्ट करके बांग्लादेश भेज दिया गया. अब प्रेग्नेंट महिला को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाया है. कोर्ट ने केंद्र सरकार से कहा कि वह पश्चिम बंगाल से बांग्लादेश भेजी गई एक गर्भवती महिला को मानवीय आधार पर भारत वापस लाने पर गंभीरता से विचार करे. यह टिप्पणी तब आई जब केंद्र सरकार ने कलकत्ता हाई कोर्ट के आदेश को चुनौती दी.
दरअसल, यह मामला सोनाली खातून नाम की एक महिला से जुड़ा है, जिसे दिल्ली में फॉरेनर्स रीजनल रजिस्ट्रेशन ऑफिस (FRRO) के एक कैंपेन के दौरान डॉक्यूमेंट्स की कमी के कारण गैर-कानूनी इमिग्रेंट घोषित कर दिया गया था. ऑपरेशन के दौरान सोनाली खातून और उसके 8 साल के बेटे को बांग्लादेश डिपोर्ट कर दिया गया था. उस समय वह प्रेग्नेंट थी.
महिला के पति ने दायर की थी याचिका
इस मामले में महिला के पिता भोदू शेख ने कलकत्ता हाई कोर्ट में एक पिटीशन फाइल की, जिसमें उन्होंने दावा किया कि वह पश्चिम बंगाल के परमानेंट रेजिडेंट हैं और उनकी बेटी और दामाद जन्म से भारतीय नागरिक हैं. परिवार नौकरी के लिए दिल्ली आया था. पिटीशन में कहा गया कि उन्हें गैर-कानूनी घोषित कर दिया गया और बिना पूरी जांच के डिपोर्ट कर दिया गया.
जानें अब कब होगी सुनवाई
कलकत्ता हाईकोर्ट ने अपने ऑर्डर में साफ़ कहा कि हालांकि हिरासत में लिए गए लोगों ने दिल्ली पुलिस के सामने बांग्लादेशी नागरिक होने की बात कबूल की है, लेकिन हो सकता है कि ये बयान दबाव या मजबूरी में दिए गए हों. कोर्ट ने इसे अपनी मर्ज़ी से दिया गया कबूलनामा नहीं माना और ऑर्डर दिया कि सोनाली खातून और उनके बेटे को चार हफ़्ते के अंदर भारत वापस भेज दिया जाए. केंद्र सरकार ने इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील की. अपील पर सुनवाई करते हुए चीफ जस्टिस सूर्यकांत और जस्टिस जॉयमाल्या बागची की बेंच ने कहा कि कोर्ट 3 दिसंबर को मामले की फिर से सुनवाई करेगा.