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नई दिल्ली/राहुल मिश्रा: सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) में बुध के रोज़ लव जिहाद (Love Jihad) से जुड़े अध्यादेश पर सुनवाई हुई. अदालत ने फिलहाल इस ऑर्डिनेंस पर रोक लगाने से इनकार कर दिया है. साथ ही कोर्ट कोर्ट इन अध्यादेशों के संवैधानिक वैधता की समीक्षा करना चाहता है, इसके लिए अदालत ने यूपी और उत्तराखंड की सरकारों को नोटिस जारी किया गया है.
चीफ जस्टिग शरद अरविंद बोबडे (Sharad Arvind Bobde), जस्टिस वी रमासुब्रमण्यम (V. Ramasubramanian) और जस्टिस ए एस बोपन्ना की बेंच ने उत्तर प्रदेश और उत्तराखंड की सरकारों को नोटिस जारी किए हैं. ये बेंच विशाल ठाकरे और अन्य सामाजिक कारकुनों तीस्ता सीतलवाड़ के गैर-सरकारी संगठन सिटीजन्स फॉर जस्टिस एंड पीस की अर्ज़ी पर सुनवाई कर रही थी.
सुनवाई के दौरान सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि इससे संबंधित मामले पहले से इलाहाबाद हाई कोर्ट में लंबित हैं, जिसके बाद कोर्ट ने पूछा कि आखिर वो हाई कोर्ट क्यों नहीं गए. याचिकाकर्ता के वकील सीयू सिंह ने कहा कि दूसरे राज्यों ने भी इस तरह के कानून बनाए हैं.
याचिकाकर्ता ने कानून पर रोक लगाने की मांग करते हुए कहा कि शादी के बीच से लोगों को उठाया जा रहा है. इन कानूनों का कुछ प्रावधान काफी भयानक है क्योंकि शादी के लिए सरकार से इजाजत का प्रावधान किया गया है जो बिल्कुल काबिले ऐतराज़ है.
सुप्रीम कोर्ट ने उत्तराखंड और यूपी सरकार को नोटिस जारी किया है और जवाब दाखिल करने के लिए चार हफ्ते का समय दिया है. इस दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने लगातार कानून पर स्टे की गुहार लगाई तब सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि अभी अदालत ने राज्य सरकार को नहीं सुना है. ऐसे में स्टे नहीं लगाया जा सकता है.
बता दें कि उत्तर प्रदेश में 28 नवंबर को लव जिहाद कानून लागू हुआ था. इस कानून का एक महीना पूरा होने पर उत्तर प्रदेश में 14 केस दर्ज किए जा चुके थे. जिसमें 51 लोग गिरफ्तार किए गए थे. अभी भी 49 मुल्ज़िम जेल में हैं. इन 14 केसों में से सिर्फ 2 में शिकायत कथित तौर पर पीड़ित लड़की की तरफ से आई है, बाकी केसों में पुलिस में शिकायत रिश्तेदारों की तरफ से दर्ज करवाई गई है.
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