मज़दूरों से न लिया जाए बस-ट्रेन का किराया, खाने-पीने का भी किया जाए इंतेज़ाम: सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्तलिफ सूबों में अलग-अलग जगहों पर फंसे प्रवासी कामगारों को उन्हीं सूबों और मरकज़ी हुकूमत के ज़ेरे इंतेज़ाम सूबों (UT) के ज़रिए खाना मुहैया कराया जाए,

मज़दूरों से न लिया जाए बस-ट्रेन का किराया, खाने-पीने का भी किया जाए इंतेज़ाम: सुप्रीम कोर्ट
फाइल फोटो

नई दिल्ली: मुहाजिर मज़दूरों के मुद्दे पर आज सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मज़दूरों से बस और रेल का किराया नहीं लिया जाए, यह किराया सूबाई हुकूमतें अदा करें. साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि रेल में सफर करने वाले मज़दूरों के लिए खाने का भी इंतेज़ाम किया जाए. इस मामले में अगली समाअत पांच जून को होगी.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि मुख्तलिफ सूबों में अलग-अलग जगहों पर फंसे प्रवासी कामगारों को उन्हीं सूबों और मरकज़ी हुकूमत के ज़ेरे इंतेज़ाम सूबों (UT) के ज़रिए खाना मुहैया कराया जाए, 

कोर्ट ने कहा कि जिन मुहाजिर मज़दूरों को सड़कों पर चलते हुए पाया जाए उन्हें फौरन शेल्टर होम में ले जाया जाए और उन्हें खाना-पानी मुहैया कराया जाए. साथ ही ट्रेन या बस से उसको उसके गांव तक भेजने का इन्तज़ाम करें. 

SC ने कहा कि सूबा मुहाजिर मज़दूरों के रजिस्ट्रेशल की देखरेख करेगा और यह यकीनी करने के लिए कि रजिस्ट्रेशल के बाद, वे एक इब्तेदाई तारीख पर ट्रेन या बस में चढ़े. पूरी जानकारी सभी मुतअल्लिकीन के लिए तशहीर (प्रचारित) की जानी चाहिए.

इससे पहले जनरल सॉलिसिटर तुषार मेहता ने कहा कि मरकज़ी हुकूमत ने अभी 3700 ट्रेनें मुहाजिर मज़दूरों के लिए चला रखी हैं, अभी तक 50 लाख मुहाजिर मज़दूर अपने गांव जा चुके हैं. तुषार मेहता ने कहा कि पड़ोसी सूबों के तआवुन से 40 लाख मज़दूरों को सड़क के रास्ते शिफ्ट किया गया है.

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