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जम्मू कश्मीर : कोरोना वायरस से कश्मीर से कन्याकुमारी तक पूरा हिंदुस्तान लॉकडाउन है. इसी बीच सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर हुकूमत को मोबाइल इंटरनेट को लेकर नोटिस जारी किया है. दरअसल एक एनजीओ ने अर्ज़ी दाख़िल की गई थी जिसमें कहा गया है कि लॉक डाउन के दौरान ख़बरों के लेन-देन के लिए बेहतर कनेक्टिविटी ज़रूरी है और इसके साथ ही बच्चों के मुस्तबिल को लेकर भी चिंता ज़ाहिर की गई है, गौरतलब है कि इस लॉकडाउन में सभी स्कूल बंद है.
अर्ज़ी की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू कश्मीर में मोबाइल इंटरनेट में 4G स्पीड की मांग पर जम्मू कश्मीर हुकूमत को नोटिस जारी किया है. रियासती हुकूमत को इसका जवाब एक हफ्ते में दाख़िल करना है. बता दें 4 जी स्पीड के बाद बच्चे अपनी पढ़ाई वीडियो कांफ्रेंसिंग से कर सकेंगे
बता दें कि यह जनहित याचिका हुकूमत के उस आदेश को चुनौती देते हुए दायर की गई है जिसमें भारत के आईन की धारा 14, 19, 21 और 21A का उल्लंघन करते हुए मोबाइल डेटा सर्विसेज़ में इंटरनेट की स्पीड को 2G तक ही सीमित कर दिया गया है।
मरकज़ी हुकूमत ने अगस्त 2019 में जम्मू-कश्मीर के मौजूदा रियासत में आर्टिकल 370 को रद्द करते हुए इंटरनेट संचार ब्लैकआउट कर दिया था। पांच महीने बाद जनवरी 2020 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश के आधार पर जिसमें इंटरनेट शटडाउन को ग़ैरआईनी कहा और उसके बाद मोबाइल यूज़र्स के लिए केवल 2G की स्पीड पर इंटरनेट को जानिबदार तौर से बहाल कर दिया गया।
सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि इंटरनेट का अनिश्चितकालीन मुअत्तली की सहमति नहीं है और इंटरनेट पर बैन को धारा 19 (2) के तहत आनुपातिकता के नियमों का पालन करना होगा। याचिकाकर्ता ने अपील की है कि स्वास्थ्य संकट के इस समय में सरकार को दायित्व के तहत "डिजिटल बुनियादी ढांचे" तक पहुंच सुनिश्चित करना आवाम के सेहत के हक़ को इफेक्टिव बनाने के लिए ज़रूरी है।
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