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Umar Khalid Bail Hearing: दिल्ली दंगे से जुड़े मामले में सुप्रीम कोर्ट ने आज सभी आरोपियों उमर खालिद, शरजील इमाम, मीरान हैदर और गुलफिशा फातिमा की जमानत याचिकाओं पर सुनवाई अगले हफ्ते तक के लिए टाल दी है. जस्टिस अरविंद कुमार और न्यायमूर्ति एन.वी. अंजारिया की पीठ ने विशेष अनुमति याचिकाओं (एसएलपी) के समूह पर विचार करने में कठिनाई व्यक्त की और कहा कि मामले की फाइलें पिछली रात बहुत देर से वितरित की गई थीं.
इस दलील पर ध्यान देते हुए कि कठोर गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम (UAPA) के तहत दर्ज आरोपियों ने दिल्ली उच्च न्यायालय द्वारा उन्हें ज़मानत देने से इनकार करने को चुनौती दी है, न्यायमूर्ति कुमार की अध्यक्षता वाली पीठ ने निर्देश दिया कि याचिकाओं के समूह को 19 सितंबर को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया जाए.
इससे पहले, दिल्ली हाईकोर्ट ने उत्तर-पूर्वी दिल्ली दंगों के पीछे कथित बड़ी साजिश के सिलसिले में कई कार्यकर्ताओं और छात्र नेताओं को ज़मानत देने से इनकार कर दिया था. 2 सितंबर को पारित अपने आदेश में, न्यायमूर्ति शालिंदर कौर और न्यायमूर्ति नवीन चावला की पीठ ने प्रथम दृष्टया पाया कि रिकॉर्ड में पर्याप्त साक्ष्य मौजूद हैं जो दर्शाते हैं कि इमाम और खालिद ने साजिश रची थी.
जस्टिस कौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि खालिद और इमाम ने 24 फरवरी, 2020 को तत्कालीन अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की राजकीय यात्रा के दौरान भड़काऊ भाषण दिए थे. अभियोजन पक्ष का आरोप है कि यह भाषण जानबूझकर 23-24 फ़रवरी को दंगे भड़काने और अंतरराष्ट्रीय ध्यान आकर्षित करने के लिए दिया गया था.
दिल्ली हाईकोर्ट ने कहा, "अपीलकर्ताओं द्वारा दिए गए कथित भड़काऊ और उत्तेजक भाषणों पर समग्रता से विचार करने पर, प्रथम दृष्टया कथित साजिश में उनकी भूमिका का संकेत मिलता है." मीरान हैदर के संबंध में हाईकोर्ट ने कहा कि उसने कथित तौर पर जामिया मिलिया इस्लामिया के पूर्व छात्र संघ को धन मुहैया कराया था, जहां जेसीसी (जेएमआई समन्वय समिति) की बैठकें आयोजित की जाती थीं.
जस्टिस कौर की अध्यक्षता वाली पीठ ने अभियोजन पक्ष की इस दलील पर भी गौर किया कि हैदर के खिलाफ जांच पूरी होने से परिस्थितियों में कोई ऐसा महत्वपूर्ण बदलाव नहीं आया जिससे ज़मानत को उचित ठहराया जा सके. पीठ ने गवाहों की लंबित परीक्षा और कथित साज़िश की गंभीरता का हवाला दिया.
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, गुलफ़िशा फ़ातिमा ने कथित साज़िश को आगे बढ़ाने के लिए प्रदर्शनकारियों को निर्देश देने के लिए कूट शब्दों का इस्तेमाल किया और इसके लिए धन प्राप्त किया. नागरिकता संशोधन अधिनियम (सीएए) और राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) के विरोध में फरवरी 2020 में भड़के दिल्ली दंगों में 53 लोग मारे गए और 700 से ज़्यादा घायल हुए.
इनपुट-आईएएनएस