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तामिलनाडु सरकार ने वक्फ बिल के खिलाफ पास किया प्रस्ताव, CM स्टालिन ने केंद्र सरकार से कर दी ये मांग

Tamil Nadu News: तामिलनाडु विधानसभा ने एक प्रस्ताव पारित किया है, जिसमे केंद्र सरकार से गुजारिश की गई है कि वक्फ बिल को वापस लिया जाए. मुख्यमंत्री स्टालिन ने अपने संबोधन में वक्फ बिल को मुसलमानों के मजहबी आजादी पर खतरा बताया है. पूरी जानकारी के लिए नीचे स्क्रॉल करें.

तामिलनाडु सरकार ने वक्फ बिल के खिलाफ पास किया प्रस्ताव, CM स्टालिन ने केंद्र सरकार से कर दी ये मांग

Tamil Nadu News: तामिलनाडु के मुख्यमंत्री एम के स्टालिन ने वक्फ संशोधन बिल 2024 का विरोध किया है, और तमिलनाडु विधानसभा में गुरुवार को एक प्रस्ताव पारित कर के केंद्र सरकार से वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 को वापस लेने की गुजारिश की गई है. मुख्यमंत्री स्टालिन ने वक्फ बिल को मजहबी मामलों में डाइरेक्ट हस्तक्षेप बताया है. सीएम स्टालिन ने गुरुवार को विधानसभा में अपने संबोधन के दौरान कहा कि वक्फ विल न सिर्फ मुसलमानों के मजहबी मामलों में हस्तक्षेप करता है, बल्कि संविधान में मौजूद मजबी आजादी का उल्लंघन भी करता है.

दरअसल, गुरुवार 27 मार्च को मुख्यमंत्री स्टालिन ने विधानसभा में वक्फ बिल के खिलाफ एक प्रस्ताव पेश किया. जिसे बहुमत के साथ पास कर दिया गया है. स्टालिन ने इस बिल को मुसलमानों के मजहबी आजादी पर खतरा बताया है. उन्होंने कहा कि यह बिल मुसलमानों के वक्फ संपत्तियों पर सरकारी नियंत्रण बढ़ावा देने के वाला है. उन्होंने कहा कि इस कानून से वक्फ संपत्तियों पर मुसलमानों के अधिकार कमजोर होगी. उन्होंने आगे कहा कि यह बिल सिर्फ मुसलमानों का मसला नहीं है, बल्कि संविधान में मौजूद मौलिक अधिकारों का हनन भी है. इस लिए तामिलनाडु विधानसभा में प्रस्तान पास कर के केंद्र सरकार से वक्फ बिल को वापस लेने की अपील की गई है.

CM स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु सरकार ने पहले ही संसदीय संयुक्त समिति के सामने अपना विरोध दर्ज कराया था, लेकिन समिति ने उनके आपत्ति को अनदेखा कर दिया था, जिसके बाद विधानसभा में औपचारिक तौर पर इसका विरोध करने के अलावा कोई रास्ता नहीं था.

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स्टालिन ने मौजूदा वक्फ बिल में शामिल एक प्रावधान पर खास आपत्ति जाताया है, जिसमें यह प्रावधान है कि अगर किसी को वक्फ में अपनी संपत्ती को दान देना है, तो वह कम से कम 5 सालों तक इस्लाम धर्म का पालन किए होना चाहिए. उन्होंने इस प्रावधान पर कहा कि यह वक्फ को कमजोर करने की कोशिश है, और इससे बिना वजह वक्फ में कानूनी पेचिदगी का सामना करना पड़ेगा. उन्होंने राज्य वक्फ बोर्डों में चुनावों को खत्म करने वाली प्रावधान का भी विरोध किया है. क्योंकि उनका मानना है कि इस प्रविधान से वक्फ बोर्ड में लोकतांत्रिक प्रोसेस खत्म होगा. उन्होंने वक्फ बोर्ड में गैर मुस्लिमों को शामिल करने वाली प्रविधान पर भी ऐतराज जताया है. 

गौरतलब है कि पिछले दिनों जमीयत ने विपक्षी दलों के साथ मिलकर राजधानी दिल्ली (जंतर-मंतर) में प्रोटेस्ट किया था. उसके बाद बिहार की राजधानी में भी विपक्षी दलों के नेताओं ने और मुस्लिम समाज ने वक्फ बिल के विरोध में प्रोटेस्ट किया है.

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