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हैदराबाद : निज़ामुद्दीन तबलीगी जमात मामले में सियासत और बयानबाजी का दौर जारी है.इसी सिम्त में तेलंगाना सीएम चंद्रशेखर राव ने तो जमातियों के बारे में पूछने पर फटकार ही लगा दी. उन्होंने सहाफियों के जमातियों पर कार्रवाई के सवाल पर तेलंगाना सीएम ने सहाफी को जमकर फटकार लगाई.उन्होंने ऐसे लोगों पर किसी तरह की कारवाई से साफ इंकार करते हुए पूछा कि आखिर उनकी गलती क्या है.वे बाजाब्ता तौर पर बीजा लेकर हिन्दुस्तान में आये हैं.जिसकी पुरी जानकारी परमीशन देने वाली एजेन्सियों को होती है
तबलीगी जमात के मामले को लेकर कर्नाटक कांग्रेस के मुस्लिम लीडरान ने सीएम बीएस येदियुरप्पा से मुलाकात की.इस दौरान उन्होंने कहा कि हुकूमत फेहरिस्त दे वे लोगों की तलाश में हुकूमत की मदद करेंगे लेकिन खौफ का माहौल खत्म होना चाहिए.
इस दौरान AIMIM सद्र असदुद्दीन ओवैसी ने भी तबलीगी जमात का दिफा किया है..उन्होंने अपने ट्वीट में लिखा कि ‘जिस इंसान का इंतकाल वबा की वजह से होता है, इस्लाम में उसका दर्जा शहीद का होता है’ फिर क्या था संबित पात्रा ने इसे शहादत की नया अंदाज करार दिया.जानलेवा बीमारी में मजहबी रंग देने की कोशिश से सबसे ज्यादा नुकसान गरीबों का होता है.जिन्हें मदद के दौरान लोग मजहब नहीं हालात देख रहे थे.
तब्लीगी जमात के इस हंगामे के सैकड़ों किमी का पैदल सफर कर रहे भूखों का दर्द नहीं दिखा.मज़हब की आड़ में डाक्टर्स और पुलिस पर हमले शुरू हो गये.तो राम नवमी के मज़हबी जलसों के दौरान सोशल डिस्टेन्सिंग की धज्जिया उड़ गई.तेलंगाना, आन्ध्र प्रदेश के अलावा दीगर मन्दिरों में पूजा के दौरान पीएम मोदी की अपील एक बार फिर नाकाम रही.हालाकि ये जानलेवा वबा किसी खास जाति या मजहब नहीं इन्सानियत के लिए खतरा है.
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