IND VS PAk: भारत-पाक के बीच हुए लड़ाई के बाद से सीमा पर रहने वाले लोगों में डर का माहौल बना हुआ है. लोग अपने घर जम्मू-कश्मीर वापस नहीं जाना चाहते हैं. लोगों का कहना है कि हमें घरों में लौटने की कोई जल्दी नहीं है. इसके साथ ही सरकार ने भी पलायन किए लोगों को अभी वापस नहीं लौटने के निर्देश दिए हैं.
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IND VS PAk: भारत-पाकिस्तान सीमा पर चल रहे गोलीबारी के वजह से कई लोगों को जम्मू-कश्मीर और बॉडर्र के इलाकों से हटाया गया था. अब सीजफायर के बाद हमले रूक गए है, लेकिन फिर भी लोग अपने घरों में वापस जाने से डरे हुए है. लोगों को अपने घरों में लौटने की कोई जल्दी नहीं है.
भारत-पाक के बीच चल रहे लड़ाई के वजह जम्मू कश्मीर और सीमा इलाके के कई लोग अपने रिश्तेदारों के घर चले गए थे. तकरीबन एक हफ्ता बिताने के बाद लोग सीजफायर को लेकर संदेह में है. उन्हें दोबारा से हमले होने का डर है. लोगों का कहना है कि जब तक हालात पूरी तरह से बहतर नहीं होगें, वह अपने घर वापस नहीं लौटेगें.
सीजफायर का उल्लंघन
सीजफायर ऐलान होने के बावजूद भी जम्मू और अमृतसर शहरों के लोग धमाकों की आवाज़ से लोग डरे हुए हैं. हालांकि इतवार यानी कि 11 मई को इन दोनों शहरों में शांति बनी हुई थी. कई दुकानों को बंद ही रखा गया और लोग भी अपने घर में रहना पसंद कर रहे हैं. भारत सरकार ने सीमा से पलायन कर चुके लोगों को फिल्हाल वापस नहीं लौटने की सलाह दी है. चार दिनों की जबरदस्त लड़ाई के बाद शनिवार को भारत-पाक ने अमेरिका के नेत्तत्व में सीजफायर पर सहमति जाहिर की थी, लेकिन कुछ ही घंटों के बाद पाकिस्तान ने सीजफायर का उल्लंघन कर दिया था.
आपको बता दें कि तकरीबन पिछले तील सालों में यह सबसे गंभीर तनाव था, जिसमें मिलाइल और ड्रोन हमले किए गए है. इन हमलों में खासकर सैनिक ठिकानों को निशाना बनाया गया, जिसमें 70 लोगों की जान गई है.
वापस न लौटने की अपील
जम्मू-कश्मीर पुलिस ने आवाम से वापस न लौटने की अपील की गई है. पुलिस ने कहा, " गांवों में वापस न जाएं, जान का खतरा है. पाकिस्तानी गोलाबारी के बाद कई बम फटे नहीं हैं." लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखते हुए सैकड़ों लोगों को घरों में स्थानांतरित किया गया, जबकि अन्य लोग लड़ाई तेज होते ही अपने रिश्तेदारों के घरों में चले गए थे.
लोगों में डर का आलम
वही जम्मू-कश्मीर की रहने वाली 22 साल की खेत मजदूर आशा देवी ने डर को जाहिर करते हुए कहा, "मैं बिहार में अपने गांव वापस जाना चाहती हूं. सीमा पर मरे नहीं जाना चाहती." इसके अलावा कब्बल सिंह ने बताया, "सीजफायर के बाद भी हुए हमलों की आवाज को सुनकर इतने डरे हुए हैं कि वापस लौटने की हिम्मत नहीं कर पा रहे हैं."
नीलम घाटी में रहने वाले पाकिस्तानी प्रशासन के अधिकारी अख्तर अयूब ने बताया, "कई लोग स्थिति के शांत होने का इंतजार कर रहे हैं, तभी वे लौटने का निर्णय लेंगे." लोगों को सोमवार दोपहर तक इंतजार करने की सलाह दी गई है.