दिल्ली तशद्दुद में अपना सब कुछ गंवा चुके कुनबों के सामने कोरोना वायरस एक बहुत बड़ी परेशानी बनकर खड़ी हो गई है. रमज़ान के महीने में इन रोज़ेदारों के सामने इफ्तार और सहरी की परेशानी ख़ड़ी हो गई है.
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नई दिल्ली/शोएब रज़ा: रमज़ान के मुक़द्दस महीने की शुरुआत हो चुकी है. रहमतों और बरकतों वाला रमज़ान इस बार गुजरे बरसों के मुकाबले बिल्कुल अलग है. महामारी से जारी लड़ाई के बीच सब लोग घरों में ही रहकर इबादत कर रहे है. लेकिन इस बार ऐसे लोगो की परेशानी बढ़ गयी है जो गरीब है दिल्ली के शिवविहार समेत कई इलाक़ो में सैंकड़ो परिवारों के सामने खाने पीने के भी लाले पड़े हुए हैं. यहां लोगों तक हुकूमत की मदद पहुंच ही नहीं पा रही है. रमज़ान के इस महीने में रोज़ा इफ़्तार और सहरी का इंतज़ाम करना भी मुश्किल हो रहा है.
दिल्ली के शिवविहार समेत कई ऐसे इलाके है जहां मुस्लिम आबादी बड़ी तादाद में रहती है गौरतलब है कि इन इलाक़ो में कुछ ही दिनों पहले फसाद हुए थे और लॉक डाउन से पहले इन्हें अपना घर छोड़ना पड़ा है. हालांकि सब ठीक होने के बाद ये लोग घरों तो वापस लौट आए है लेकिन हज़ारो कुनबों के सामने खाने पीने और जरूरत के सामान का परेशानी खड़ी हो गई है. खासतौर पर रमज़ान के इस महीने में इफ्तार और सहरी के लिए भी कई मुश्किलात है.
यहां रहने वाली ख़्वातीन का कहना है कि कोई राशन देता है तो खा लेते हैं, इफ्तार के लिए फल और सेहरी के लिए दूध उन्हें नहीं मिल पा रहा और ना ही उनके पास इसे खरीदने के पैसे हैं.उनका कहना है कि हर रमज़ान वो दूसरे लोगों को इफ्तार कराया करते थे, लेकिन पहले फसाद में सबकुछ खत्म हुआ और फिर महामारी की चलते रोजगार बंद हो गए और आज हालात ये आ गए है कि जिंदगी गुजारना मुश्किल हो गया है.
हालांकि हुकूमत का कहना है कि वो इस संजीदा वक्त में सबके लिए खाने पीने का इंतज़ाम कर रही है.बावजूद इसके इन इलाकों में हालात ज्यादा बेहतर नज़र नहीं आ रहे हैं. जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि दिल्ली हुकूमत के साथ साथ मरकज़ी हुकूमत भी इन रोज़ेदारों पर अपनी नज़रेसानी करेगी.
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