Opinion: विकास का दावा और स्कूलों पर ताला; क्या अनपढ़ बनेगा इंडिया?

Opinion: किसी भी मुल्क और समाज की तरक़्क़ी का असल पैमाना उसकी तालीम होती है. सड़कें, पुल, इमारतें और बड़े-बड़े प्रोजेक्ट अपनी जगह अहम हैं, लेकिन अगर बच्चों के हाथ से किताब छिन जाए और स्कूलों के दरवाज़ों पर ताले लगने लगें तो विकास के तमाम दावे खोखले नज़र आने लगते हैं. आज उत्तर प्रदेश की तालीमी सूरत-ए-हाल को लेकर यही सवाल बार-बार उठ रहा है कि आखिर हुकूमत की असली तरजीह क्या है-तालीम या सिर्फ़ उसका प्रचार?

Opinion: विकास का दावा और स्कूलों पर ताला; क्या अनपढ़ बनेगा इंडिया?