अब सभी सरकारी नौकरियों के लिए एक ही ऐजेंसी कराएगी परीक्षा; कई आयोग हो सकते हैं भंग !
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अब सभी सरकारी नौकरियों के लिए एक ही ऐजेंसी कराएगी परीक्षा; कई आयोग हो सकते हैं भंग !

केंद्रीय कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री जितेंद्र सिंह (Minister Jitendra Singh) ने गुरुवार को राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में बताया कि केंद्र सरकार के अलग-अलग विभागों में होने वाली भर्तियों के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (National Recruitment Agency)   द्वारा परीक्षा आयोजित की जाएगी.

 

अब सभी सरकारी नौकरियों के लिए एक ही ऐजेंसी कराएगी परीक्षा; कई आयोग हो सकते हैं भंग !

नई दिल्लीः केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह (Central Minister Jitendra Singh) ने गुरुवार को कहा कि केंद्र सरकार (Central Government) के अलग-अलग विभागों में होने वाली भर्तियों की प्रक्रिया (Process of Recruitment) को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए राष्ट्रीय भर्ती एजेंसी (National Recruitment Agency  ) द्वारा एक ही परीक्षा आयोजित की जाएगी. कार्मिक एवं प्रशिक्षण राज्य मंत्री सिंह ने राज्यसभा में प्रश्नकाल के दौरान पूरक सवालों के जवाब में यह जानकारी दी. उन्होंने कहा कि सरकार की योजना संयुक्त पात्रता परीक्षा को इसी साल शुरू करने की थी लेकिन यह मुमकिन नहीं हो सका. 

बैंक और एसएससी से जुड़े पद इसमें होंगे शामिल 
जितेंद्र सिंह ने कहा कि नई व्यवस्था के तहत देश के प्रत्येक जिले में कम से कम एक परीक्षा केंद्र होगा ताकि किसी को असुविधा नहीं हो. शुरूआती चरण में बैंक, रेलवे और कर्मचारी चयन आयोग (एसएससी) से जुड़े पदों को इस परीक्षा में शामिल किया जाएगा और आगे चलकर इस व्यवस्था को व्यापक बनाया जाएगा.

केंद्र सरकार के कर्मचारियों की संख्या हुई 40.04 लाख
सिंह ने आंकड़ों का हवाला देते हुए कहा कि इस सरकार के सात साल के कार्यकाल में न सिर्फ भर्ती प्रक्रिया को तेज किया गया है बल्कि नए पदों के सृजन पर भी जोर दिया गया है. उन्होंने कहा कि 2014 में इस सरकार के कार्यभार संभालने के समय केंद्रीय पदों की कुल स्वीकृत संख्या 36.45 लाख थी जो 2020 के अंत तक बढ़कर 40.04 लाख हो गई है.

मुकदमेबाजी में भर्ती प्रक्रिया होती है प्रभावित 
सिंह ने कहा कि इस सरकार के पहले के सात साल यानी 2007-08 से 2013-14 के दौरान 6.19 लाख नियुक्तियां की गईं जबकि इस सरकार के कार्यकाल में अब तक 6.98 लाख भर्तियां की गईं. हालांकि इस दौरान करीब डेढ़ साल का समय कोविड-19 महामारी से भी प्रभावित रहा. उन्होंने स्वीकार किया कि मुकदमेबाजी के कारण भी कई बार भर्तियों में देरी होती है लेकिन सरकार की ओर से कोई विलंब नहीं किया जाता है. उन्होंने प्रोन्नति में अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) के आरक्षण से जुड़े एक सवाल के जवाब में कहा कि यह मामला अभी न्यायालय में है.

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