गांव में पानी की ऐसी कमी थी कि ना हलक तर हो पाता और ना ही फसल पैदा होती. इस मुसीबत से निपटारे का एक ही तरीका था कि गांव में नहर बनाई जाए और पानी पहाड़ से लाकर इकट्ठा किया जाए.
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नई दिल्ली: आपको ऐसे शख्स से मिलवाते हैं जिसने मेहनत और लगन के दम पर ऐसी मिसाल पेश की है जो जल्दी से कहीं देखने को नहीं मिलती. इस शख्स का नाम बृद्ध लौंगी भुईया है जिसने 30 साल की मेहनत करके अपने दम पर गांव में पूरी नहर बना दी.
मांझी फिल्म का ये डायलॉग आपको जरूर याद होगा, जिसमें दरशत मांझी एक पहाड़ का सीना चीरकर रास्ता बना देते हैं. बिहार में दरशत मांझी के इस काम को देखकर हर कोई हैरान रह गया था लेकिन अब एक और मांझी की लगन और मेहनत की ऐसी दांस्ता सामने आई है जो सबको चौंका रही है. 70 साल के बुजुर्ग बृद्ध लौंगी भुईयां के चेहरे पर झुर्रिया पड़ गई है लेकिन हिम्मत ऐसी कि बरसों बरस तक उनकी मेहनत और लगन को याद किया जाता रहेगा.
राजधानी पटना से तकरीबन 200 किमी दूर है बृद्ध लौंगी का गांव कोठीलवा. ये गांव कभी नक्सल मुतास्सिर हुआ करता था. गांव में पानी की ऐसी कमी थी कि ना हलक तर हो पाता और ना ही फसल पैदा होती. इस मुसीबत से निपटारे का एक ही तरीका था कि गांव में नहर बनाई जाए और पानी पहाड़ से लाकर इकट्ठा किया जाए.
बृद्ध लौंगी भुईया ने ऐसा ही करने की मन में ठान ली और वो जमीन की छाती तब तक चीरते रहे जब तक गांव में नहर ना बन गई. बृद्ध लौंगी भुईया ने अकेले फावड़ा चलाकर तीन किलोमीटर लंबी, 5 फ़ीट चौड़ी और तीन फ़ीट गहरी नहर बना दी थी. आज यह नहर लबालब भरी है और गांव वालों के काम आ रही है. ये काम करने में बृद्ध लौंगी भुईया को 30 साल का लम्बा वक्त लग गया.
नहर बनाने को लेकर इंताजमिया को भी कहा गया था लेकिन किसी ने भी नहीं सुनी. अब हर तरफ लौंगी भुईयां की तारीफ हो रही है और उन्हे एज़ाज़ से नवाज़ा जा रहा है. कई समाजी लोग गांव में पहुंचकर लौंगी भुईयां से मिल रहे हैं और हुकूमत से लौंगी भुईयां की मदद की दरख्वास्त कर रहे हैं.
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