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नई दिल्ली: साल 1999 के झारखंड कोल ब्लॉक में घोटाले से जुड़े मामले की सुनावई करते हुए दिल्ली की राउज एवेन्यू कोर्ट ने सजा पीर के रोज़ सज़ा का ऐलान किया. अदालत ने सज़ा का ऐलान करते हुए मामले में साबिक मरकज़ी वज़ीर केंद्रीय दिलीप रे समेत तीन कुसूरवारों को 3 साल की सज़ा और 10-10 लाख रुपए का जुर्माना भी लगाया है.
इस मामले में 6 अक्टूबर को सीबीआई की खास अदालत ने मरकज़ी वज़ीर दिलीप रे को 1999 में इस मामले में मुजरिम करार पाया था. जिसपर अदालत ने अब सज़ा का ऐलान किया है. अदालत ने साबिक मरकज़ी वज़ीर के अलावा कोयला मिनिस्ट्री के उस वक्त दो सीनियर अफसर प्रदीप कुमार बनर्जी और नित्या नंद गौतम, कैस्ट्रोन टेक्नोलॉजीज लिमिटेड (सीटीएल) के डायरेक्टर महेंद्र कुमार अग्रवाल और कैस्ट्रॉन माइनिंग लिमिटेड (सीएमएल) को भी कुसूरवार ठहराया है.
बता दें कि अटल बिहारी बाजपेयी की कयादत वाली उस वक्त की एनडीए की हुकूमत के दौरान दिलीप रे कोयला मिनिस्टर थे. 1999 में झारखंड के गिरीडीह में ब्रह्मडीह कोयला ब्लॉक के बांटने में हुई गड़बड़ी में उनकी नाम आया था.
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